वनस्थली विद्यापीठ महिला शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य कर रही है- प्रो. टीजी सीताराम
4 हजार 338 छात्राओं को प्रदान की उपाधियाँ

निवाई : वनस्थली विद्यापीठ का 41वाँ दीक्षांत समारोह गुरूवार को आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम रहे। मुख्य अतिथि प्रो. टीजी सीताराम ने विद्यापीठ के कई प्रमुख केन्द्रों का अवलोकन किया व विद्यापीठ में संचालित गतिविधियों से रूबरू हुए। मुख्य अतिथि अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम ने कहा कि विश्व में महिलाओं की सबसे बड़ी आवासीय शिक्षण संस्था के दीक्षान्त समारोह में आकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आज सभी दीक्षार्थियों के लिए उत्सव का दिन है। आज आपके कठिन परिश्रम, समर्पण एवं दृढता का फल आपको मिल रहा है। उन्होंने सभी दीक्षार्थियों को बधाई दी।
उन्होंने अभिभावकों एवं उनके परिवार सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपके त्याग, उत्साह और विश्वास के परिणाम स्वरूप आज आपकी भावी पीढ़ी उज्ज्वल भविष्य की तरफ कदम बढ़ा रही है। वनस्थली की लीडरशिप भी प्रशंसा के पात्र है कि उन्होंने महिला शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि आज तक मैंने अपने जीवनकाल में इस तरह की विश्वस्तरीय घुड़सवारी, फ्लाईंग नहीं देखी। शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है परन्तु यहाँ पर जिस तरह की बहुविषयक पारंपरिक एवं नवाचार से युक्त आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस का समिश्रण है। इससे ही विकसित भारत 2047 की परिकल्पना साकार होगी।
उन्होंने कहा कि आप अपने आईडियास् को विश्व पटल पर लेकर जॉब क्रियेटर बनें। आप सभी को उभरते हुए तकनीकी क्षेत्रों में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व से ही भारत अग्रणी बनेगा। उन्होंने कहा कि चन्द्रयान की सफलता में महिला शक्ति का अहम योगदान रहा है। उन्होंने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थाओं की भीड़ में वनस्थली विद्यापीठ ने अलग मुकाम हासिल किया है और न केवल देश में अपितु विदेशों में ख्याति हासिल की है। इस दौरान स्वागत द्वार पर पर मुख्य अतिथि का विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ शास्त्री, उपाध्यक्ष, प्रो. ज्योति पारीक, कुलपति प्रो. ईना आदित्य शास्त्री, सेन्टर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के निदेशक डॉ. अंशुमान शास्त्री व कोषाध्यक्ष प्रो. सुधा शास्त्री ने स्वागत किया। वनस्थली सेवा दल के बैंड द्वारा राष्ट्रीय सलामी के उपरान्त छात्राओं ने पारंपरिक शैली में तिलक लगाकर एवं सूत की माला पहनाकर स्वागत गान के साथ अभिनन्दन किया।
तत्पश्चात् मुख्य अतिथि प्रो. टीजी सीताराम ने वनस्थली की मूल प्रेरणा शक्ति स्थल श्री शांताबाई शिक्षा कुटीर व संस्थापकों के निवास स्थान गाँधी घर का अवलोकन किया। कुलपति, प्रो. ईना आदित्य शास्त्री द्वारा मुख्य अतिथि को इन स्थानों की महत्ता से अवगत कराया। तदुपरांत मुख्य अतिथि लक्ष्मीबाई मैदान में ध्वजारोहण कर वनस्थली सेवादल द्वारा प्रस्तुत परेड में सम्मिलित हुए। कला मंदिर में छात्राओं एवं देश-विदेश के अग्रणी कलाकारों की चित्रकारी एवं पेटिंग्स का अवलोकन किया। वीरबाला मैदान में घुड़सवारी, महादाजी सिंधिया शूटिंग रेंज में शूटिंग एवं मारूत मैदान में फ्लाइंग क्लब की गतिविधियों का अवलोकन भी किया।
उन्होंने विद्यापीठ के चयनित शैक्षिक विभागों-स्कूल ऑफ लाईफ साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन, इंजिनियरिंग वर्कशाप, स्कूल ऑफ ऑटोमेशन एवं सेन्टर फॉर आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स का परिदर्शन कर मेधावी छात्राओं एवं वरिष्ठ अध्यापकों से वार्ता की। संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा सुर मंदिर सभागार में प्रस्तुत शास्त्रीय संगीत एवं राजस्थानी लोक नृत्य कार्यक्रम का अवलोकन किया। दीक्षांत समारोह राष्ट्रगान से प्रारंभ हुआ। वनस्थली की परम्परा के अनुसार मंगलाचरण किया। कुलपति प्रो. ईना आदित्य शास्त्री ने कहा कि भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम ने कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने भारत की कई राष्ट्रीय संस्थानों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए लगभग पैंतीस वर्षों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि प्रो. टीजी सीताराम को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए कर्नाटक सरकार के युवा वैज्ञानिकों के लिए सर सीवी रमण राज्य पुरस्कार से सम्मानित हुए व विज्ञान के क्षेत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक राज्य पुरस्कार मिला है। प्रो. ईना आदित्य शास्त्री ने बताया कि वनस्थली ने 1935 में यह यात्रा शुरू की जब महिला शिक्षा की संकल्पना ही नहीं थी।
हमारे संस्थापकों ने घर-घर जाकर छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। कई दशकों तक बिना कोई शुल्क के यह कार्य किया गया। करीब नौ दशक पूर्व प्रारंभ हुई यह संस्था आज विश्व का सबसे बड़ा महिला आवासीय विश्वविद्यालय बन गया है जहाँ करीब 16 हजार छात्राएँ अध्ययनरत् हैं। 850 एकड़ क्षेत्र में फैले राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में स्थित इस अनूठे शैक्षिक आदर्श को लेकर चले। संस्थान में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की शिक्षा है। प्रो. ईना आदित्य शास्त्री ने मुख्य अतिथि का आभार प्रकट किया। समारोह में दीक्षार्थियों को पीएच.डी, स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियाँ व वनस्थली विद्यापीठ के अध्यक्ष द्वारा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दीक्षा प्रदान की गई। मुख्य अतिथि ने छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया।
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों में कुल 4 हजार 338 छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की गई। जिनमें से 332 दीक्षार्थियों को पीएच-डी उपािध दी गई एवं 122 छात्राओं को मुख्य अतिथि ने स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन वनस्थली विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ शास्त्री द्वारा मुख्य अतिथि को शॉल और कोषाध्यक्ष प्रो. सुधा शास्त्री द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया। सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निदेशक प्रो. अंशुमान शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन वनस्थली विद्यापीठ की छात्राओं द्वारा शांति पाठ और राष्ट्रगान के साथ किया।
What's Your Reaction?






