जयपुर । दिल्लीवासियों सहित अप्रवासी राजस्थानियों के दिलों पर राजस्थानी कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और खानपान की यादें छोड़कर नौ दिवसीय राजस्थान उत्सव मेले का बुधवार को समापन हुआ। राजस्थान उत्सव में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) से संबंधित महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा राजस्थानी संस्कृति और लोक कला को समेटे हुए हस्तकला निर्मित उत्पादों को बिक्री के लिए प्रदर्शित किया गया था। उत्सव के दौरान राजस्थान के विभिन्न अंचलों की महिला आर्टिजंस ने लगभग 60 स्टॉलों पर अपनी कला का सजीव प्रदर्शन कर दर्शकों और खरीददारों को अपनी ओर आकर्षित किया।
राजस्थान उत्सव में राजीविका की तरफ से मेले का संचालन देख रहे रमेश कुमार ने बताया कि मेले में आर्टिजंस के स्टॉल्स पर 50 लाख से ज्यादा की अच्छी बिक्री हुई है। इन स्टॉल्स पर राजस्थान की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, कपड़े, आभूषण, जैविक उत्पाद, पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन इत्यादि बिक्री के लिए लगाए गए, जिससे आगंतुकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तकला का बखूबी परिचय हुआ।
रमेश ने बताया कि राजीविका की महिलाओं द्वारा लगाए गए इन स्टॉल्स पर महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बेचने से न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक संबल मिला बल्कि उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उत्सव में आने वाले लोगों ने इन हस्तनिर्मित वस्तुओं को खूब सराहा और बड़ी मात्रा में खरीदारी भी की।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में नौ दिवसीय राजस्थान उत्सव-2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने किया था। उत्सव में इस वर्ष भी पेंटिंग प्रतिस्पर्धा, मेहंदी प्रतिस्पर्धा, गोलगप्पा खाने की प्रतिस्पर्धा के साथ ही पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। जिसमें अव्वल आने वाले प्रतिभागियों को सांत्वना पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।