यूएई में राजस्थानी बिजनेसमैन ने दी सेवा को प्राथमिकता
यूएई में फंसे भारतीयों को गाड़ियों से दुबई में अपने फार्महाउस ले गए, खाने-पीने की नि:शुल्क व्यवस्था की
जयपुर: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण तमाम भारतीय दुबई सहित अन्य देशों में फंसे हुए हैं। फ्लाइट्स कैंसिल होने के कारण ये लोग भारत लौट नहीं पा रहे। इसमें नौकरीपेशा से लेकर टूरिस्ट तक शामिल हैं। तमाम लोगों के पैसे भी खत्म हो गए हैं। उनके वहां ठहरने से लेकर खाने-पीने तक की दिक्कत आ गई है। ऐसी मुसीबत की घड़ी में राजस्थान के रहने वाले बिजनेसमैन धीरज जैन मददगार बनकर सामने आए हैं। जैन यूएई में रियल एस्टेट डेवलपर हैं।
धीरज जैन पिछले करीब 11 वर्षों से यूएई में रियल एस्टेट डेवलपर हैं। उन्होंने बताया- अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग जैसे हालात बनने के बाद यूएई में एहतियातन कई फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। इसके साथ ही होटल बुकिंग भी रद्द होने लगीं। अचानक फ्लाइट और होटल कैंसल होने से बड़ी संख्या में भारतीय यात्री दुबई सहित अन्य शहरों में फंस गए। कई लोग सीमित बजट में यात्रा पर आए थे, ऐसे में अतिरिक्त खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं था। उनके सामने ठहरने और खाने-पीने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी।
धीरज जैन के अनुसार, जैसे ही उन्हें भारतीयों के फंसे होने की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर अपना मोबाइल नंबर जारी कर दिया। उन्होंने संदेश दिया कि जो भी भारतीय यूएई में फंसा है और जिसके पास रुकने की व्यवस्था नहीं है, वह अजमान स्थित उनके फॉर्म हाउस में ठहर सकता है। संदेश जारी होने के बाद उनके पास लगातार कॉल आने लगे और मदद का सिलसिला शुरू हो गया।
दुबई में रियल स्टेट डेवलपर धीरज जैन मूल रूप से राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता सिटी के रहने वाले हैं। जैन ने बताया- कई लोगों के पास उनके फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए परिवहन की सुविधा भी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपनी गाड़ियां लगाईं और दुबई व अन्य शहरों से लोगों को खुद बुलवाया। वर्तमान में उनके फार्म हाउस में करीब 200 भारतीय ठहरे हुए हैं। सभी हालात सामान्य होने और फ्लाइट्स दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर 300 लोग ठहर सकें, इसकी तैयारी की जा रही है।
नागौर के मेड़ता सिटी के रहने वाले धीरज जैन ने बताया- भारत में मेरे परिवार वाले चिंतित थे। मैं चाहता तो अपनी प्राइवेट व्यवस्था से देश लौट सकता था। मैंने संकट की इस घड़ी में यूएई में रुककर अपने लोगों की मदद करना ज्यादा जरूरी समझा। भारतीयों के अलावा अन्य देशों के नागरिकों के भी कॉल आ रहे हैं और उन्हें भी यथासंभव मदद दी जा रही है।
What's Your Reaction?

