संस्कृत राष्ट्र की आत्मा, लोगों से इसे सीखने अपील: मोहन भागवत
अक्षय तृतीया के दिन जो कार्य प्रारंभ होते, वह अक्षुण्ण रहते
नई दिल्ली। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संस्कृत को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए लोगों से इसे सीखने अपील की है। भागवत ने दिल्ली में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर सोमवार को कहा कि संस्कृत भारती एक ऐसी संस्था है जो संस्कृत को एक जीवंत और व्यापक रूप से प्रयुक्त भाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान और वैश्विक प्रसार में अग्रणी संस्था संस्कृत भारती का नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय भवन ‘प्रणव’ नौ मंजिला है और यहअत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।
भागवत ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन जो कार्य प्रारंभ होते हैं, वह अक्षुण्ण रहते हैं। यही बात संस्कृत के बारे में कहा गया है। कभी न क्षय होने वाला आभूषण संस्कृत है। उसका कार्यालय अपने आप में यह संदेश दे रहा है। कार्यालय के उद्घाटन में उसके आनंद उत्साह में कार्य का भाव भी स्थिर होना चाहिए। रुचि के साथ प्रयोजन भी हो तो कार्य अच्छा और निरंतर होता है। साधन नहीं अवस्था में कार्य आरम्भ होता है।
किसी भी भाषा को सीखने का सबसे आसान तरीका उसमें पूरी तरह डूब जाना और नियमित रूप से उसका उपयोग करना है। उन्होंने कहा जब भी मैं भारत भर में यात्रा करता हूं, भले ही मुझे विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की विशिष्ट शब्दावली का ज्ञान न हो, फिर भी मैं भाव और अर्थ को समझ पाता हूं।
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