संस्कृति से संस्कारों का आगमन होता है - विकसंत सागर
विकसंत सागर महाराज संध का गाजे बाजे के साथ हुआ मंगल प्रवेश
निवाई। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में उपाध्याय विकसंत सागर महाराज ससंघ गाजे बाजे के साथ मंगल प्रवेश हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने उपाध्याय विकसंत सागर महाराज के समक्ष श्रीफल चढ़ाकर नगर प्रवेश करवाया। जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा ने बताया कि उपाध्याय विकसंत सागर महाराज जयपुर से पदमपुरा, चाकसू एवं विज्ञा तीर्थ से पद विहार करते हुए निवाई पहुंचे, जहां सुशील आरामशीन, विष्णु बोहरा, महावीरप्रसाद पराणा, सुनील भाणजा, विमल पाटनी, नवरत्न टोंग्या, गोपाल कठमाणा, हुकमचंद जैन, दिनेश चंवरिया, महेश मोठूका, मुकेश बनेठा, अशोक भाणजा, रामपाल चंवरिया, संजय जैन, राकेश संघी व गिर्राज चंवरिया सहित कई श्रद्धालुओं ने उपाध्याय महाराज का पाद प्रक्षालन करके आरती करते हुए अगुवानी की।
उन्होंने बताया कि उपाध्याय विकसंत सागर महाराज का संघ जुलूस के साथ राधा दामोदर जी के कुण्डो से गाजे बाजे के साथ रवाना होकर पुलिस थाना, अहिंसा सर्किल, झिलाय रोड होते हुए अग्रवाल जैन मंदिर पहुंचा। जहां महाराज संघ ने मूलनायक भगवान शांतिनाथ जी के दर्शन किए। इस दौरान धर्म सभा का मंगलाचरण मीनाक्षी भाणजा ने एवं समाज द्वारा दीप प्रज्वलित किया।
उपाध्याय विकसंत सागर महाराज ने कहा कि संसारी अवस्था को तो पाल सकते हो, परन्तु साधु को पालना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि संस्कार कुल परम्परा से आते है। इसके साथ समाज, माता पिता व मित्रों से भी संस्कारों का सहज अवग्रहण होता है। उन्होंने कहा कि संस्कृति से संस्कारों का आगमन होता है। संस्कार भी दो प्रकार के होते हैं, कुछ अच्छे संस्कार होते हैं और कुछ बुरे संस्कार भी होते हैं। न जाने किसमे कब कैसे संस्कार आ जाते हैं। इसी प्रकार वीतरागता व अन्नत गुणों से संस्कारित होने पर पतित आत्मा की पुनीत बन जाती है। इस दौरान मुनि विश्वामित्र सागर एवं मुनि आचार सागर महाराज ने भी धर्म सभा को संबोधित किया। धर्म सभा से पूर्व सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा उपाध्याय विकसंत सागर महाराज को ग्रीष्मकालीन प्रवास हेतु श्रीफल चढ़ाकर पूजा अर्चना की।
What's Your Reaction?

