3.81 करोड़ के फॉरेक्स ट्रेडिंग महाघोटाले का भंडाफोड़

टेलीग्राम ग्रुप बनाकर ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बैंक खाता प्रदाता नागपुर से गिरफ्तार

Jul 11, 2026 - 20:06
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3.81 करोड़ के फॉरेक्स ट्रेडिंग महाघोटाले का भंडाफोड़

जयपुर । राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि टेलीग्राम ग्रुप “CMC Global CS” के जरिए 3 करोड़ 81 लाख रुपये की सनसनीखेज साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले गिरोह के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले मुख्य आरोपी रक्षक राहुल गजभिये को नागपुर (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर लिया गया है।
     यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की विशेष टीम द्वारा की गई है।
गूगल सर्च से शुरू हुआ ठगी का खेल, जयपुर के डॉक्टर बने शिकार
इस महाघोटाले की शुरुआत तब हुई जब मालवीय नगर जयपुर निवासी परिवादी डॉ. प्रेम रतन (45) ने इंटरनेट पर निवेश के विकल्प तलाशे। उन्होंने 5 अक्टूबर 2025 को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।
    रिपोर्ट के अनुसार परिवादी ने जब गूगल सर्च इंजन पर निवेश और ट्रेडिंग के उद्देश्य से CMC Global CS नामक विदेशी फॉरेक्स ट्रेडिंग वेबसाइट को सर्च किया, तो साइबर ठगों के सिस्टम में उनकी जानकारी पहुंच गई। इसके तुरंत बाद भारत स्थित उनके तथाकथित 'कस्टमर केयर' से डॉक्टर के पास फोन आया।
टेलीग्राम पर एंट्री और फर्जी आईडी: ठगों ने परिवादी को एक टेलीग्राम लिंक भेजकर अपने मुख्य ग्रुप “CMC Global CS” से जोड़ दिया। ग्रुप में भरोसा जीतने के बाद, उनके रजिस्ट्रेशन के नाम पर आधार एवं पैन कार्ड जैसे व्यक्तिगत दस्तावेज ले लिए गए। इसके बाद एक फर्जी वर्चुअल ट्रेडिंग पोर्टल पर डॉक्टर का खाता खोलकर उन्हें यूजर आईडी और पासवर्ड सौंप दिए गए।
छोटा रिटर्न दिखाकर फंसाया, 3.81 करोड़ होते ही ग्रुप से किया डिलीट
साइबर अपराधियों ने डॉ. प्रेम रतन को जाल में फंसाने के लिए बेहद शातिर और मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया  शुरुआत में ठगों ने परिवादी से बहुत कम राशि का निवेश करवाया और उस पर तुरंत छोटा लेकिन वास्तविक रिटर्न वापस देकर उनका भरोसा जीत लिया।
    एक बार विश्वास बहाल होने के बाद, पीड़ित को भारी रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये का निवेश करने के लिए उकसाया गया। ठगों द्वारा बनाए गए वर्चुअल पोर्टल के डैशबोर्ड पर डॉक्टर को अपना निवेश किया हुआ पैसा लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा था, जो कि वास्तव में सॉफ्टवेयर द्वारा जनरेट किया गया महज एक फर्जी आंकड़ा था।
    जब निवेश की राशि ₹3 करोड़ 81 लाख तक पहुंच गई और डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने वर्चुअल पोर्टल के माध्यम से अपने पैसे वापस निकालने का प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने निकासी की रिक्वेस्ट डाली, साइबर अपराधियों ने तुरंत डॉक्टर को अपने टेलीग्राम ग्रुप से रिमूव कर दिया और उनकी चैट डिलीट कर संपर्क पूरी तरह काट दिया।
तकनीकी विश्लेषण से नागपुर तक पहुंची जयपुर साइबर पुलिस
करोड़ों रुपये की इस हाइटेक ठगी को चुनौती के रूप में लेते हुए साइबर एसपी सुमित मेहरड़ा के नेतृत्व में एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया। टीम ने ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों, टेलीग्राम ग्रुप्स के आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबरों का गहन तकनीकी विश्लेषण किया।
    कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस टीम महाराष्ट्र के नागपुर पहुंची, जहां इस पूरे गिरोह को पैसे ट्रांसफर करने के लिए फर्जी बैंक खाते सप्लाई करने वाले आरोपी रक्षक राहुल गजभिये को दबोच लिया गया। पुलिस आरोपी को नागपुर कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लेकर आई है, जिससे पूछताछ में इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और देश भर में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
     थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा (उप अधीक्षक पुलिस) के नेतृत्व में इस जटिल और बड़े अंतरराज्यीय मामले का पर्दाफाश करने वाली टीम में टीम प्रभारी पुलिस निरीक्षक राधेश्याम, कांस्टेबल कृष्ण कुमार (तकनीकी विश्लेषण), दिनेश, कृष्ण और कांस्टेबल चालक सूबे सिंह शामिल थे।

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SJK News Chief Editor (SJK News)