अजमेर पुलिस का मिशन इम्पॉसिबल 16 साल से फरार हत्या के दोषी को दबोचा
कांस्टेबल प्रकाश और अजय की जांबाजी ने पेश की मिसाल
अजमेर। अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो और हुलिया बदलकर कहीं भी छिप जाए, कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं। अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला द्वारा लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 'ह्यूमन इंटेलिजेंस' और 'ट्रेडिशनल पुलिसिंग' का लोहा मनवाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। 16 साल पहले पैरोल से फरार हुए आजीवन कारावास के दोषी करण सिंह उर्फ कन्ना सिंह रावत निवासी नाहरपुरा थाना जवाजा को पुलिस की विशेष टीम ने फिल्मी अंदाज में पीछा कर दबोच लिया।
दो कांस्टेबलों की 'स्पेशल टीम' और 16 साल पुरानी फोटो एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने इस पुराने और पेचीदा मामले को सुलझाने का टास्क पुलिस लाइन के दो जांबाज कांस्टेबल प्रकाश सिंह बिष्ट और अजय कुमार जाट को सौंपा और पूरे आॅपरेशन के दौरान स्वयं लगातार मॉनिटरिंग करते रहे। हर छोटे-बड़े अपडेट पर एसपी टीम को सीधे दिशा-निर्देश देते रहे।कांस्टेबल प्रकाश और अजय के पास सुराग के नाम पर फाइल में लगी एक 16 साल पुरानी धुंधली फोटो थी, जिसमें आरोपी घनी दाढ़ी में नजर आ रहा था। बिना किसी तकनीकी सुराग के इन दोनों जवानों ने शून्य से अनुसंधान शुरू किया।
भेष बदलकर गांव-गांव की जासूसी
पहला पड़ाव (जवाजा): टीम सबसे पहले आरोपी के मूल गांव नोहरपुरा पहुंची, लेकिन वहां सन्नाटा मिला। किसी ने सालों से उसे नहीं देखा था।
दूसरा पड़ाव (कामलीघाट): जांच में पता चला कि आरोपी के दो भाई राजसमंद के कामलीघाट में रहते हैं। दोनों जवानों ने वहां 5-7 दिन तक डेरा डाला, भेष बदलकर जानकारी जुटाई, लेकिन भाइयों ने अनभिज्ञता जताई और ग्रामीणों ने इनके तीसरे भाई के होने से ही इनकार कर दिया।
तीसरा पड़ाव (खरावड़ी): हार न मानते हुए दोनों जवानों ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। पता चला कि आरोपी ने अपना हुलिया बदल लिया है, अब दाढ़ी-मूंछ कटवाकर वह गंजा हो गया है और 'रामजी दया' के फर्जी नाम से खरावड़ी गांव में मिस्त्री का काम कर रहा है।
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