राजस्थान सीसाइड स्टार्टअप समिट-2026

स्टार्टअप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरणीय चिंता सहित विभिन्न सामयिक मुद्दों पर हुआ मंथन, विभिन्न स्टार्टअप संचालकों को निवेशकों और विशेषज्ञों के समक्ष पिचिंग का मिला अवसर

Mar 1, 2026 - 14:06
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राजस्थान सीसाइड स्टार्टअप समिट-2026
राजस्थान सीसाइड स्टार्टअप समिट-2026

जयपुर । राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के सहयोग से ओपन इनोवेशन लोटस फाउंडेशन और आर्मेनिया सरकार द्वारा होटल ताज आमेर में आयोजित तीन दिवसीय 'राजस्थान सीसाइड स्टार्टअप समिट' का दूसरा दिन विभिन्न विचारोत्तेजक सत्रों के नाम रहा। शनिवार को स्टार्टअप से जुड़े पांच महत्वपूर्ण सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पूंजी निर्माण, पर्यावरणीय चिंता, 30 की उम्र से पहले की तैयारी और आइडिया से इम्पैक्ट तक की स्टार्टअप यात्रा पर विभिन्न विशेषज्ञों, मेंटर्स और निवेशकों ने गहन चर्चा की। साथ ही इस दौरान विभिन्न स्टार्टअप को मेंटर्स और निवेशकों के सामने पिचिंग का भी अवसर मिला, जिसमें उन्होंने प्रभावी तरीके से अपने स्टार्टअप की विशेषताओं को प्रदर्शित किया।  

उल्लेखनीय है कि इस समिट में देश—विदेश के 130 से अधिक स्टार्टअप भाग ले रहे हैं, जिनमें लगभग 80 स्टार्टअप राजस्थान से जुड़े हैं। रविवार को समिट का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह से पूर्व पिच सेशन का 'ग्रेंड फिनाले' भी आयोजित किया जाएगा। 

सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है एआई

जयगढ़ बॉलरूम में आयोजित सत्र 'एआई फॉर एवरीवन' में इस बात पर मंथन किया गया कि स्टार्टअप किस तरह बड़े संसाधनों के बिना भी स्केलेबल एआई बना सकते हैं। सत्र में आर्थर वैगनर, सीईओ-रेगॉम, अक्षित बंसल, फाउंडर-स्टैक, दिव्य अग्रवाल, को-फाउंडर-बिंज लैब्स, कौस्तुभ धवसे, मुख्य सलाहकार-महाराष्ट्र सरकार और आर्यन ग्रोवर, फाउंडर-वीटोएआई ने स्टार्टअप्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सुलभ, स्केलेबल और कम लागत वाला बनाने की दिशा में कई सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि अब एआई केवल बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। ओपन सोर्स मॉडल्स, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एपीआई-आधारित एआई सेवाओं के कारण स्टार्टअप्स बिना भारी पूंजी निवेश के प्रभावशाली एआई प्रॉडक्ट विकसित कर सकते हैं। वक्ताओं ने सहमति जताई कि स्टार्टअप्स को फाउंडेशनल मॉडल्स खुद बनाने की बजाय मौजूदा एआई प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करना चाहिए और वास्तविक उद्योग समस्याओं पर केंद्रित एप्लीकेशन्स विकसित करनी चाहिए।

स्मार्ट कैपिटल जुटाने की कला: निवेशक वास्तव में क्या देखते हैं

'रेजिंग स्मार्ट केपिटल' सत्र में स्टार्टअप्स द्वारा स्मार्ट कैपिटल जुटाने की चुनौतियों और निवेशकों की वास्तविक अपेक्षाओं पर मंथन किया गया। चर्चा में निखिल नंदा, फाउंडर-जेएचएस स्वेनगार्ड, मृगांक जैन, मैनेजिंग पार्टनर-ग्लोबल साउथ कैपिटल, रजत मेहता, मैनेजिंग डायरेक्टर-मेहता ग्रुप, पार्वती मूर्ति, एवीपी लिस्टिंग एसएमई-नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और हाकोब हाकोब्यान, कोफाउंडर-सीसाइड स्टार्टअप समिट ने सहमति जताई कि आज की 'स्मार्ट कैपिटल' आक्रामक ग्रोथ फंडिंग से हटकर रणनीतिक, मूल्य-आधारित और अनुशासित निवेश की ओर बढ़ रही है। निवेशक स्टार्टअप्स की दृष्टि की स्पष्टता, बुनियादी मजबूती, बिजनेस मॉडल की स्केलेबिलिटी और फाउंडिंग टीम की निष्पादन क्षमता पर विशेष ध्यान देते हैं। निखिल नंदा ने ऑपरेशनल अनुशासन और सस्टेनेबल स्केलिंग की अहमियत बताई। मृगांक जैन ने ग्लोबल कैपिटल फ्लो और उभरते बाजारों में मजबूत गवर्नेंस तथा संरचित ग्रोथ की अपील पर प्रकाश डाला। रजत मेहता ने वित्तीय विवेक, प्रॉफिटेबिलिटी पाथवे और कैपिटल एफिशिएंसी को प्रमुख मूल्यांकन पैरामीटर बताया। पार्वती मूर्ति ने अनुपालन तैयारियों, गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स और एसएमई लिस्टिंग सहित संरचित ग्रोथ पाथवे पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जोर दिया कि 'ड्यू डिलिजेंस' अब काफी कठोर है और स्टार्टअप्स को वित्तीय पारदर्शिता, कानूनी स्पष्टता तथा ऑपरेशनल परिपक्वता साबित करनी होगी। हाकोब हाकोब्यान ने अंतरराष्ट्रीय वेंचर परिप्रेक्ष्य से सेक्टर-फोकस्ड निवेश, माइलस्टोन-आधारित फंडिंग और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन की बात की। उन्होंने क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क्स और इकोसिस्टम पार्टनरशिप्स की भूमिका को रेखांकित किया।

सरकार, स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री के बीच पर्यावरणी मुद्दों पर हो सहयोग

'द रोड टू नेट-जीरो' सत्र कार्बन नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक त्रिपक्षीय सहयोग पर केंद्रित रहा। यशराज अकाशी, संस्थापक-एज कम्यूनिटी के संचालन में हुई इस खुली और व्यावहारिक चर्चा में शुभम अग्रवाल, डायरेक्टर—ग्रीन ड्रीम रिसाइक्लर्स, इशिता बंसल, कोफाउंडर-प्लेनेक्स रिसाइक्लिंग, अवाग सिमोन्यान, कोफाउंडर-ट्रिपल एस वेंचर्स और यशराज खेतान, सीईओ-पॉलेरिस ग्रिड्स द्वारा नेट-जीरो की वास्तविक चुनौतियों और उन्हें दूर करने के व्यावहारिक रास्तों पर गहन संवाद किया गया। चर्चा में बताया गया कि नेट-जीरो उद्योग जगत की आवश्यकता है, वहीं यह स्टार्टअप्स के लिए अवसर भी है। भले ही स्टार्टअप्स को पूंजी, पर्यावरणीय निर्देशों और उपभोक्ताओं के व्यवहार से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़े, लेकिन पर्यावरण की चिंता सभी के लिए जरूरी है और दीर्घकालिक लाभ का रास्ता खोलती है। यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी भी है। पैनल इस बात पर सहमत था कि नेट-जीरो का लक्ष्य सरकार, उद्योग जगत एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के सहयोग से हासिल किया जा सकता है। दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति छोटे—छोटे लक्ष्य बनाकर की जा सकती है। 

30 वर्ष की उम्र से पहले स्टार्टअप्स बनाने की प्रेरणादायक यात्रा

'यंग एंड बोल्ड' पैनल चर्चा में 30 वर्ष से कम उम्र में सफल स्टार्टअप्स खड़े करने वाले युवा उद्यमियों ने अपनी चुनौतियां, सीख और विजन साझा किए। सत्र का उद्देश्य शुरुआती चरण के फाउंडर्स को प्रेरित करना, लचीलापन सिखाना और दूरदर्शिता विकसित करना था। यशराज भारद्वाज, कोफाउंडर-ओपन इनोवेशन लोटस फाउंडेशन के संचालन में हुई इस चर्चा में जीवराज सिंह सच्चर, फाउंडर-इंडियन सिलिकॉन वैली कैपिटल, सुदीक्षा जैन, कोफाउंडर-नेसेसेरा, राहिल गुप्ता, कोफाउंडर-हॉप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, युवराज भारद्वाज, कोफाउंडर-ओपन इनोवेशन लोटस फाउंडेशन तथा ऋद्धि जैन, कोफाउंडर-नेसेसेरा ने हिस्सा लिया। चर्चा की शुरुआत में 30 वर्ष से पहले स्टार्टअप बनाने की अनोखी चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला गया। पैनल ने कहा कि युवावस्था सिर्फ ऊर्जा और रिस्क लेने की क्षमता नहीं, बल्कि विजन की स्पष्टता, अनुकूलनशीलता और तेजी से सीखने की शक्ति भी है। चर्चा में इन सवालों पर मंथन किया गया कि क्या कार्रवाई और विजन किसी फाउंडर को अलग बनाते हैं? युवा उद्यमी अपनी उम्र, नेटवर्क और टीम का कैसे लाभ उठाकर सस्टेनेबल प्रभाव पैदा कर सकते हैं? पैनलिस्ट्स ने अपनी यात्राओं से उदाहरण दिए—कैसे कम उम्र में ही बड़े फैसले लेने, असफलता से उबरने और स्केल करने की सीख मिली। चर्चा में रेजिलिएंस, टीम बिल्डिंग, मेंटरशिप की तलाश और असफलताओं से सीखने पर विशेष जोर रहा।

परंपरा पर टिका आधार– विचार से प्रभाव तक

'बिल्ट ऑन ट्रेडिशन' में किसी विचार को सफल उद्यम में बदलने की यात्रा पर गहन चर्चा हुई। परंपरा, लचीलापन, नैतिकता और नेतृत्व जैसे मूल्यों पर जोर देते हुए वक्ताओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। हर्षी गिलारा भारद्वाज, सीईओ-ओपन इनोवेशन लोटस फाउंडेशन के संचालन में हुई इस पैनल चर्चा में गेवोर्ग गेवोर्ग्यान, फाउंडर-ऑटो गैलरी, विजय शारदा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-कान्हा ग्रुप, कारेन गेवोर्ग्यान, डीएआई- ग्लोबल यूके आर्मेनिया ब्रांच मैनेजर, प्रफुल बिलोरे, फाउंडर-एमबीए चायवाला और अनंत कुमार, कोफाउंडर-ब्रिज होटल्स ने हिस्सा लिया। सत्र में चर्चा हुई कि विचार एक बीज की तरह है, जिसे सही इरादे, रणनीति और दृढ़ता से सींचने पर मजबूत और प्रभावशाली वृक्ष बनाया जा सकता है। हालांकि, बीज से स्केल तक की यह यात्रा रैखिक नहीं होती, बल्कि इसमें निरंतर प्रयास, धैर्य और दूरदर्शिता की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों ने नए स्टार्टअप्स को सलाह दी कि विफलता से डरने की बजाय उसे सीखने की प्रक्रिया मानना चाहिए। प्रत्येक विफलता मूल्यवान सबक देती है और लंबे समय की सफलता की सीढ़ी बनती है। 

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SJK News Chief Editor (SJK News)