निजी स्कूलों ने फिर बढ़ाई मनमानी फीस, 10 से 25 फीसदी तक बढ़ाई फीस

राज्य सरकार और शिक्षा विभाग मूक बधिर हो निजी स्कूलों को संरक्षण देने के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुलेआम उड़वा रहा है धज्जियां - अभिषेक जैन बिट्टू

Mar 21, 2025 - 18:47
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निजी स्कूलों ने फिर बढ़ाई मनमानी फीस, 10 से 25 फीसदी तक बढ़ाई फीस

जयपुर। नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल माह से प्रारंभ होने वाला है किंतु सत्र के प्रारंभ होने से पहले ही अभिभावकों पर स्कूलों की मनमानी फीस का संकट गहरा गया है। जयपुर सहित प्रदेशभर के लगभग सभी निजी स्कूलों ने फीस एक्ट कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए मनमाने तरीके से नए सत्र में भी स्कूलों की फीस बढ़ा दी है जबकि पिछले सत्र में ही स्कूलों ने फीस में भारी बढ़ोतरी की थी बावजूद इसके नए सत्र के प्रारंभ होने से पहले एक बार फिर अभिभावकों पर फीस का संकट खड़ा कर दिया है। संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया कि नए सत्र 2025-26 के लिए निजी स्कूलों ने 10 से 25 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है, जो ना केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है बल्कि राज्य की विधानसभा में पारित हुए " फीस विनियामक अधिनियम विधेयक (स्कूल फीस एक्ट 2016-17) तक की अवहेलना है, एक्ट के अनुसार स्कूलों को 3 साल में फीस बढ़ाने का अधिकार है वह भी तब है जब स्कूल फीस एक्ट कानून की पालना सुनिश्चित करता है तो अन्यथा वह फीस भी नहीं बढ़ा सकता है। "

संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेश में निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती जा रही है जो अभिभावकों पर ना केवल आर्थिक संकट खड़ा कर रही है बल्कि मानसिक तनाव तक झेलने पर मजबूर कर रही है। स्थिति इतनी विकट है अभिभावक अगर आवाज उठाता है उसके बच्चों का भविष्य खराब कर दिया जाता है और अगर वह आवाज नहीं उठाते है तो मजबूर मानसिक दबाव से ग्रस्त हो रहे है। प्रदेश में अगर निजी स्कूल संचालक मनमानी कर रहे है तो इसका स्पष्ट कारण राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का मूक बधिर होना सबसे बड़ा कारण बना हुआ है और सरकार व प्रशासन के संरक्षण के चलते निजी स्कूल खुलेआम सुप्रीम कोर्ट के आदेश 3 मई 2021 और 1 अक्टूबर 2021 की धज्जियां उड़ा रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में स्कूलों में फीस एक्ट की पालना सुनिश्चित करने का आदेश दिया हुआ है किंतु विगत 4 वर्षों ना स्कूल एक्ट की पालना कर रहे है ना ही राज्य सरकार और शिक्षा विभाग एक्ट की पालना सुनिश्चित करवा रहे है आलम यह है प्रदेश के 99.99 फीसदी स्कूल में फीस एक्ट का पालन ही नहीं हो रहा है, कुछ स्कूल ने फीस को लेकर निर्धारित एसएलएफसी (स्कूल लेवल फीस कमेटी) जो बनानी होती है वह तक फर्जी बनाई हुई है, संयुक्त अभिभावक संघ इस संदर्भ में शिक्षा विभाग को तथ्यों के साथ दर्जनों पर पत्र तक लिख चुका है किंतु शिक्षा विभाग ने ऐसे किसी भी स्कूल पर कार्यवाही सुनिश्चित नहीं, जिसके चलते अभिभावकों में अब आक्रोश फैलता जा रहा है।

क्या यह स्कूल फीस एक्ट 2016-17

स्कूल फीस एक्ट 2016 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार में विधानसभा के पटल पर पारित हुए था और फरवरी 2017 में प्रदेश में लागू हो गया था, एक्ट लागू होने के साथ ही स्कूलों ने विरोध जताया और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, अभिभावकों में जागरूकता के अभाव में इस एक्ट की जानकारी नहीं देखी गई, किंतु वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी का दौर लगा जब प्रदेश में सभी व्यवसायिक, शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक तमाम गतिविधियों पर रोक लगी और लोकडाउन तब दुबारा स्कूलों की फीस मामले ने तुल पकड़ा उस दौरान संयुक्त अभिभावक संघ को स्कूल फीस एक्ट की जानकारी मिली और एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फैसला विचाराधीन की जानकारी मिली तब संयुक्त अभिभावक संघ ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले पर आदेश देने से पूर्व अभिभावकों पक्ष रखने के लिए केविएट लगाई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया, संघ के प्रयासों से अभिभावकों को फीस एक्ट की जानकारी मिली और फरवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए अंतरिम आदेश सुनाया और फाइनल फैसला 3 मई 2021 को सुनाया उस फैसले में फीस एक्ट कानून को प्राथमिकता के साथ लागू करने का आदेश दिया गया और फीस एक्ट से निर्धारित फीस का 85 % फीस जमा करवाने का आदेश अभिभावकों को सुनाया, जिसे अभिभावकों ने सहर्ष स्वीकार लिया किंतु स्कूल संचालकों ने इस फैसले का दुबारा विरोध किया और पुनः विचार याचिका लगाई जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2021 को फाइनल फैसला यथावत रखा केवल कमेटी में जिन 5 अभिभावकों का चयन करने की प्रक्रिया में बदलाव कर अकाउंट की जानकारी रखने वाले अभिभावकों को फीस निर्धारण करने वाली स्कूल लेवल फीस कमेटी में चुनने का प्रावधान का बदलाव किया था इसके अतिरिक्त कोई बदलाव नहीं किया गया।

एक्ट के अनुसार प्रत्येक स्कूलों को नए सत्र प्रारंभ होने के साथ ही पेरेंट-टीचर एसोसिएशन (पीटीए) का गठन करना अनिवार्य है जिसमें स्कूल के प्रत्येक अभिभावक और टीचर सदस्य होने, जिसकी शहरी क्षेत्र में सदस्य शुल्क 50 रु और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 रु सदस्यता शुल्क जमा करवाना अनिवार्य है। पीटीए गठन के पश्चात स्कूलों को स्कूल लेवल फीस कमेटी (एसएलएफसी) का गठन करना होता है जिसमें 10 सदस्य होते है एक अध्यक्ष जो स्कूल का ट्रस्टी/डायरेक्टर में से एक, एक सचिव जो स्कूल के प्रिंसिपल होंगे, 3 टीचर जिसका चयन स्कूल करता है और 5 अभिभावक होते है। 5 अभिभावकों के चयन के लिए पीटीए को सूचित कर निर्धारित समय तक आवेदन मांगे जाते है अगर निर्धारित समय पर 5 से अधिक अभिभावकों के आवेदन प्राप्त होते है तो सभी अभिभावकों और टीचरों की उपस्थिति में लॉटरी सिस्टम के माध्यम से 5 अभिभावकों का चयन करना अनिवार्य है जिसकी सूचना प्रत्येक स्कूल संचालक को ना केवल स्कूल की वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होती है बल्कि शिक्षा विभाग को भी यह जानकारी उपलब्ध करवानी होती है। इस प्रक्रिया के पश्चात स्कूल को अगर फीस बढ़ानी होती है तो वह एसएलएफसी कमेटी की मीटिंग बुलाता है और उसमें स्कूल के प्रत्येक खर्चों को रखना होता है जिसके आधार अगले सत्र की फीस का निर्धारण कमेटी द्वारा किया जाता है।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया

जवाहर नगर सेक्टर 4 निवासी युवराज हसीजा ने बताया कि उनका एक बच्चा सेक्टर 4 के नामी स्कूल में पढ़ाई करता है पिछले सत्र 2024-25 में उस स्कूल में कक्षा 1 से 11 तक की फीस 76800 रु रखी गई थी, वही अब नए सत्र 2025-26 में उसी स्कूल ने कक्षा 1 से 11 वीं तक की फीस 83400 रु कर दी है जो पिछले बार के मुकाबले 6600 रु अधिक है जबकि स्कूल ने आजतक ना पीटीए का गठन किया है ना एसएलएफसी कमेटी बनाई हुई है, व्यापार ठप होते जा रहे है महंगाई और मनमानी बढ़ती जा रही है ऐसे में अब चिंता सता रही है कैसे परिवार पाले कैसे बच्चों का भविष्य बनाएं।

युवराज हसीजा, अभिभावक

जयपुर के एक और नामचीन स्कूल एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल ने भी पिछले सत्र के मुकाबले इस सत्र में लगभग 6 से 7 हजार रु की फीस में बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि स्कूल ने अभी इस पर कही भी अपटेड नहीं डाला है किंतु जानकारी प्राप्त हुई है कि स्कूल से 6 से 7 हजार रु फीस बढ़ा रहा है। जैसे जैसे अभिभावकों को जानकारी मिल रही है वह इस फैसले का विरोध कर रहा है।

अरविंद अग्रवाल - अभिभावक

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SJK News Chief Editor (SJK News)