श्रमण सस्कृति संस्कार शिविर में बच्चो ने पढ़ा धर्म का पाठ
नाटक के माध्यम से अष्ट कर्मो का महत्व बताया
जयपुर। मानसरोवर वरुण पथ दिगमबर जमीन मंदिर में दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति की ओर से आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर का उत्साह उमंग के साथ समापन हुआ डिजिटल युग में जहां बच्चे गर्मियों की छुट्टियों का अधिकांश समय मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया पर बिताते हैं। 'संस्कार शिक्षण शिविरों' के माध्यम से धार्मिक शिक्षा ग्रहण की ।
शिविर समापन में बच्चो ने सांस्कृतिक पस्तुतियो से आगंतुकों का मन मोह लिया शिववीर समापन संध्या में बच्चों को समाज समिति द्वारा परितोष वितरण कार्यक्रम में मुख्य अथिति शिला ड्योडा ने कहा बच्चों में संस्कारो का बीजारोपण समाज में भविष्य की नीव को मजबूत करेगा। बच्चों को रोजाना देव दर्शन और नियमित धार्मिक पाठशाला में सहभागिता में भाग लेने की प्रेरणा प्रदान करे आज समाज में बच्चो के साथ ही श्रमण संस्कृति की नोव मजबूत बनेगी।
श्रमण संस्कृति संस्कार शिविरों में बच्चों को नैतिक मूल्यों, धार्मिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति के संस्कारों से जोड़ा जाता है। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य बच्चों में अहिंसा, सदाचार और सही जीवनशैली की समझ विकसित करना है। शिविर में बच्चों को बड़ों का सम्मान करना, सात्विक भोजन, और दैनिक जीवन में सदाचार का महत्व ज्ञान दिया जाता है। संस्कार शिविर आयोजन समिति में वरुण पथ जैन समाज समिति पदाधिकारी सुनील गंगवाल ने बताया बच्चों में धार्मिकसंस्कारो से वे धर्म पथ अग्रसर होते है।
What's Your Reaction?

