नए भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए पीएम मोदी निरंतर कार्यशीलः- मदन राठौड़
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के सवाल के जवाब में आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन में दी जानकारी

जयपुर । राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि नए भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर कार्यशील है। पीएम मोदी देश के विकास के लिए हर क्षेत्र में नई आयाम स्थापित करने का कार्य कर रहे है फिर चाहे वो परिवहन क्षेत्र हो, इन्फ्रास्ट्रेक्चर मजबूत करने का मामला हो, व्यापार जगत हो, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा का क्षेत्र हो। मोदी सरकार हर क्षेत्र में प्रतिभाओं को नए अवसर देने के साथ नई टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। ऐसा ही प्रयोग मोदी सरकार ने आयुर्वेद के क्षेत्र में किया। आयुर्वेद क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ आयुर्वेद चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को भी प्रोत्साहन देने का प्रयास किया है। इस दिशा में मोदी सरकार राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार देने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के सवाल के जवाब में आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने यह जानकारी सदन में दी।
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्च उपलब्धियां हासिल करने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाता है। आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2017 में राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से अधिसूचना जारी कर प्रतिवर्ष धनतेरस को आयुर्वेद दिवस मनाने तक की घोषणा की। धन्वंतरि पुरस्कारों के लिए नामांकन गृह मंत्रालय के सामान्य एकीकृत राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए जाते है। इतना ही नहीं, जहां सरकारी आयुष शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता अपर्याप्त है, वहां राष्ट्रीय आयुष मिशन की ओर से संस्थान स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि आयुर्वेद क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग, नई दिल्ली द्वारा विभिन्न प्रयास किए गए है। इसके तहत आयुर्वेद शोध पत्रों के प्रकाशन में शिक्षकों, यूजी और पीजी के विद्वानों तथा चिकित्सकों को अनुदान भी दिया जाता है। वहीं स्टूडेंटशीप प्रोग्राम फॉर आयुर्वेद चलाया जा रहा है और साहित्यिक अनुसंधान के लिए भी अनुदान दिया जा रहा है।
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