ग्रन्थकार सम्मान से सम्मानित हुए कैलाशचन्द परवाल
हिन्दी महाकाव्य रामायण एंव श्रीकृष्णम् की काव्य रचना करने पर जयपुर के सरल को मिला सम्मान। चैबीस भगवान अर्थात् तीर्थंकरों पर एक बड़ी काव्य रचनाकार परवाल

जयपुर. जयपुर के चार्टड एकाउण्टेट डां कैलाशचन्द परवाल सरल को उनके द्वारा रचित हिन्दी काव्य ग्रन्थ रामायण एंव श्रीकृष्णम् की उत्कृष्टता को देखते हुए उन्हें हाल ही मे संसद भवन मे ग्रन्थकार सम्मान से सम्मानित किया गया ।
लोक सभा अध्यक्ष माननीय ओम बिडल द्धारा परवाल को एक सम्मान पत्र एंव प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया एवं बिडला द्धारा उनके इस पुनीत कार्य के लिए शाॅल ओढा कर अभिनन्दन किया गया । बतादें कि परवाल को पूर्व मंे भी देश ही नहीं विदेशों मे भी सम्मानित किया जा चुका हैै। उन्हंे ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारत गौरव सम्मान भी दिया जा चुका है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्धारा मांनस संगम साहित्य सम्मान दिया गया है ।
डाॅ. परवाल को कुछ माह पूर्व ही केन्द्रीय सडक परिवहन मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी द्वारा इण्डियन अचीवर्स अवार्ड भी दिया गया।
डाॅ. कैलाशचन्द परवाल ‘सरल’ - आध्यात्मिक परिचय
सरल रामायण के रचनाकार डाॅ. कैलाश परवाल ‘सरल’ व्यावसायिक पृष्ठभूमि के साथ पेशे से जयपुर के एक प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाॅउण्टेण्ट हैं।
राम कथा पर आधारित ‘‘सरल रामायण’’ के नाम से प्रसिद्ध उनका स्वरचित महाकाव्य पूरे विश्व मे स्थान बना चुका है। इसमे 5000 से अधिक दोहे/चैपाइयाँ है। उनके इस ग्रन्थ के अंश संस्कार एवं शुभ चैनल के माध्यम से विश्व के लगभग 150 देशों मे प्रसारित होते रहते हैं। उनकी इस काव्य रचना की पुस्तक एवं आॅडियो सीडी पचास हजार से अधिक संख्या में मुद्रित हो चुकी है। इस पावन ग्रन्थ के अंशों को सोशल मीडिया पर 3 लाख से अधिक लोग देख चुकें हैं।
रामायण विषय पर ही डाॅक्टरेट की उपाधि प्राप्त श्री परवाल द्वारा अभी हाल ही में जैन धर्म के सभी चैबीस भगवान अर्थात् तीर्थंकरों पर एक बड़ी काव्य रचना की गई है, जिसकी आॅडियो सीडी एवं पुस्तिका अभी हाल ही में प्रसिद्ध जैन संत श्री प्रमाण सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अनावरित की गई है। अल्पकाल में ही यह रचना भी ख्याति प्राप्त कर चुकी है। परवाल द्वारा रचित गीता मनका 108 एवं श्री सत्यनारायण भगवान की व्रत कथा पद्यावली भी भक्तजनों में बहुत अधिक प्रचलित हैै।
विश्व के प्रथम हिन्दी काव्य-ग्रन्थ सरल विरचित ‘रामायण’ के प्रति भक्तों के झुकाव ने परवाल को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित काव्य-ग्रन्थ भी लिखने को प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण के अदृश्य आदेश और भक्तों की प्रेरणा और आशीर्वाद के फलस्वरूप ‘सरल’ द्वारा ‘श्रीकृष्णम्’ नामक हिन्दी काव्य ग्रन्थ की रचना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंगों को डाॅ परवाल ने विष्णु पुराण, गर्ग संहिता, भागवत पुराण और महाभारत महाकाव्य के संस्कृत भाषा के मूल ग्रन्थों से लेकर हिन्दी के दोहे/चैपाई रचना में संकलित किया है। सरल विरचित ‘श्रीकृष्णम्’ भगवान श्रीकृष्ण के सभी प्रसंगों पर आधारित किसी भी भाषा में एक मात्र काव्य ग्रन्थ है। इसमें 6000 से अधिक दोहे/चैपाइयाँ हैं। परवाल विरचित रामायण एवं श्रीकृष्णम्, दोनों ग्रन्थों के आधार पर भारत की प्रसिद्ध आध्यात्मिक हस्तियों ने उनकी काव्य रचना की प्रशंसा एवं सराहना की है, जिनमें योग गुरु बाबा रामदेव, जाने माने संत श्री मोरारी बापू, आर्ट आॅफ लिविंग फाॅउन्डेशन के श्री श्री रवि शंकरजी, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानन्द जी, भारत माता मन्दिर हरिद्वार के स्वामी सत्यमित्रा नन्दजी, साध्वी ऋतम्भराजी, उज्जैन के जीवन प्रबन्धन समूह के पण्डित विजय शंकर जी मेहता, वृन्दावन के आचार्य पीयूष जी एवं ओजस्वी सन्त जैन मुनि तरुण सागर जी प्रमुख है। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिडला ने भी दोनों ग्रन्थों को देखकर उद्गार व्यक्त किये हैं। भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अम्बानी के आवास ‘एन्टिलिया’ स्थित निजी मन्दिर में ‘‘श्रीकृष्णम्’’ पुस्तक स्थापित की गई है।
राष्ट्रीय स्तर के टी.वी. चैनल्स में सैंकडों बार रामायण के अंशों के प्रसारण के अतिरिक्त, डाॅ परवाल के साक्षात्कार एवं कवरेज, आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं पत्र पत्रिकाओं में अनेक बार उनको एवं उनकी रचनाओं को कवरेज मिला है।
पूर्व में राजस्थान के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान हेतु राज्य सरकार द्वारा सवाई मानसिंह स्टेडियम में प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया है। आज श्री परवाल रचित ग्रन्थ जन-जन के अंतर्मन में गहराई तक उतर चुके हैं।
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