एसओजी की बडी कार्रवाई: डिजिटल अरेस्ट करने वाली गैंग का पर्दाफाश
झांसा देकर बनाते थे, मासूम लोगों को अपना शिकार

जयपुर । एसओजी की टीम ने बडी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट कर भोले भाले लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाली गैंग का शनिवार को पर्दाफाश कर दिया।
गिरफ्तार आरोपित राकेश गंवारिया जामडोली आगरा रोड, दिलीप कुमार मीणा हमीरपुर टोडारायसिंह नगर टोंक, संजीत कुमार बोली सवाई माधोपुरा, सुमर्थ रजनेश मलारना डूंगर सवाई माधोपुर, अंकित मीणा बोली सवाई माधोपुर, राहुल शर्मा सूरवाल सवाई माधोपुर, मनराज मलारना डूंगर सवाई माधोपुर, चैनसिंह मलारना डूंगर सवाई माधोपुर, संदीप संगरिया हनुमानगढ़, तरुण वर्मा नाहरगढ़, देवेन्द्र सिंह हनुमानगढ़, दिलखुश मीणा लालसोट दौसा, विनेश कुमार हमीरवास चूरू और ब्रज किशोरी तेमानी श्याम नगर अजमेर बाईपास रोड श्याम नगर का रहने वाले है।
एडीजी वीके सिंह और डीआईजी परिस देशमुख से मिली जानकारी के अनुसार 23 से 30 नवम्बर 2024 तक अजमेर में एक वृद्ध महिला को वाट्सएप वीडियो कॉल कर महिला को डिजिटल अरेस्ट होने का डर दिखाकर 80 लाख रुपए की ठग लिए थे। मामला अजमेर में दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन एसओजीए जयपुर में केस ट्रांसफर किया गया। इस केस में एएसपी मोहेश चौधरी के नेतृत्व में टीम ने महिला से ठगी गई राशि की जांच की तो सामने आया कि रुपए 150 खातों में ट्रांन्सफर किए हैं। इन सभी खाता मालिकों को टीम ने चिन्हित किया। जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की राशि विभिन्न खातों से होती हुई साइबर ठगों के मार्फत यूएसडीटी द्वारा क्रिप्टो करंसी में परिवर्तन किया जा रहा है। इस क्रम में अब तक 15 आरोपीयों को गिरफ्तार कर 13 लाख रुपए, 27 मोबाइल फोन, 43 डेबिट कार्ड 19 पासबुक तथा 15 चैक बुक विभिन्न बैंकों के, 16 सिम कार्ड, 13 पेन कार्ड, आधार कार्ड, एक लैपटॉप, एक गाड़ी स्विफ्ट वीडीआई बरामद की गई। गिरफ्तार किए 15 आरोपियों में राकेश, दिलीप, सुमर्थ, रजनेश, अंकित, राहुल शर्मा, मनराज यह खाते उपलब्ध करवाते हैं। दिलखुश इन खाता धारकों से खाते के किट इकट्ठा कर संजीत, चैनसिंह, संदीप को देते हैं। संजीत और चैनसिंह ठगी की राशी को नगद लेकर उसे तरुण, 12 देवेन्द्र सिंह, विनेश कुमार, बृज ऽ किशोर को देकर यूएसडीटी में रूपान्तरित करवाते थे। साइबर ठगों की ओर से ठगी की राशि के कमीशन को अपने मंहगे शौक पूरा करने के काम में लिया जाता था। गिरफ्तार साइबर टगों का देशभर में कई साइबर ठगी के मामलों शामिल होने की सम्भावना है।
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