सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025, एक मंच पर पूरा भारत
350 से अधिक स्वयं सहायता समूह ले रहे भाग
जयपुर. राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद द्वारा जवाहर कला केंद्र जयपुर में 18 दिसंबर से 4 जनवरी 2026 तक आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025, अपनी भावपूर्ण थीम ‘भारत-एक सूत्रधार’ के साथ देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का भव्य उत्सव प्रस्तुत कर रहा है। इस मेले में भारत के विभिन्न राज्यों की विशिष्ट टेक्सटाइल परंपराएं, लोक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कलाएँ एक ही मंच पर जीवंत रूप में दिखाई दे रही हैं। माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान भजनलाल शर्मा के कर कमलों द्वारा मेले के उद्घाटन के उपरांत मंत्रीगण, विधायकगण एवं वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस मेले में पधार रहे हैं एवं महिलाओं का मनोबल बढ़ाते हुए मेले की सरहाना कर रहे हैं। मेले की लोकप्रियता का अंदाजा इसके फुटफॉल से लगाया जा सकता है, अब तक 1 लाख से अधिक आगंतुक मेले का आनंद ले चुके हैं और आने वाले सप्ताह में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
मेले में देशभर से 350 से अधिक स्वयं सहायता समूह भाग ले रहे हैं, जिन्होंने 2,000 से अधिक प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध कराए हैं। स्टॉल्स पर गोटा-पट्टी, जरी, लहरिया, बंधेज, अजरक, ब्लॉक प्रिंट, कांथा वर्क, टसर सिल्क, पश्मीना और ऊनी वस्त्रों की मनमोहक छटा देखने को मिलती है, जिनमें कुर्तियाँ, घाघरे, लहंगे, साड़ियां, सूट, दुपट्टे, बेडशीट, तकिए और सोफा कवर शामिल हैं। इसके अलावा बणी-ठणी, मधुबनी और अन्य लोक शैलियों की पारंपरिक व पोर्ट्रेट पेंटिंग्स, कोर्सेट, ड्रेस और टू-पीस सेट जैसे हस्तनिर्मित परिधान कला प्रेमियों को भा रहे हैं। मेले में बहुरंगी सजावटी उपहार, लकड़ी और टेराकोटा की कलाकृतियाँ, घोड़ा-हाथी और राजा-रानी की आकृतियाँ, पारंपरिक मोजड़ी जूतियाँ, जूट बैग, बाँस की कलात्मक वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन, आॅर्गेनिक मसाले, स्नैक्स, माउथ फ्रेशनर, कैंडी और शुगर-फ्री चॉकलेट जैसी विविध वस्तुएँ भी उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा, परंपराओं और रचनात्मकता को एक सूत्र में पिरोता हुआ एक जीवंत और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान कर रहा है।
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