सांगानेर के तलघर से निकलीं 800 वर्ष पुरानी जिन प्रतिमाएं दर्शन

सांगानेर के ठोलियान मंदिर में 800 साल पुरानी 127 दुर्लभ जिन प्रतिमाएं 3 साल बाद भू-गर्भ से बाहर निकाली गई हैं। आचार्य संघ के सानिध्य में इनका महामस्तकाभिषेक हो रहा है। श्रद्धालु 27 अप्रैल तक ही इन अलौकिक प्रतिमाओं के दर्शन कर सकेंगे।

Apr 24, 2026 - 17:23
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सांगानेर के तलघर से निकलीं 800 वर्ष पुरानी जिन प्रतिमाएं दर्शन
सांगानेर के तलघर से निकलीं 800 वर्ष पुरानी जिन प्रतिमाएं दर्शन

जयपुर । सांगानेर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ठोलियान में ऐसा दृश्य बना. जिसने सैकड़ों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. करीब 500 से 800 साल पुरानी दुर्लभ जिन प्रतिमाएं, जो वर्षों से मंदिर के भू-गर्भ में सुरक्षित थीं, उन्हें 3 साल 3 महीने बाद पहली बार बाहर निकाला गया। जैसे ही ये अतिशयकारी जिनबिम्ब दर्शन के लिए प्रकट हुए, पूरे परिसर में जयकारों की गूंज और श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा।

प्रतिमाएं ‘अलौकिक धरोहर’

बता दें कि मंदिर के प्राचीन चैत्यालय में कुल 130 जिनबिम्ब विराजमान हैं, जिनमें से 127 प्रतिमाओं को बाहर लाया गया. ये प्रतिमाएं बहुमूल्य धातुओं, दुर्लभ रत्नों और प्राचीन पत्थरों से बनी हैं, जो इन्हें ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों रूप से अद्वितीय बनाती हैं । आचार्य सुन्दर सागर महाराज और शशांक सागर महाराज के सानिध्य में मंत्रोच्चार के बीच इन प्रतिमाओं का पंचामृत अभिषेक और महामस्तकाभिषेक किया गया । श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण किसी दिव्य दर्शन से कम नहीं था।

देव करते हैं अभिषेक-तलघर की रहस्यमयी स्थिति
आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने बताया कि जब भूगर्भ का लोहे का द्वार खोला गया, तो अंदर की वेदियों पर पानी भरा हुआ था और संरचना जर्जर हो चुकी थी । इसे देवों द्वारा किए जा रहे अभिषेक का संकेत माना गया. विशेष बात यह भी रही कि दो प्रतिमाएं अंदर ही छोड़ दी गईं, ताकि देव अभिषेक की परंपरा जारी रह सके ।

सुबह 7 बजे से नित्य अभिषेक और शांतिधारा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई । इसके बाद अष्टद्रव्य पूजा, देव आज्ञा और फिर जिनबिम्बों को बाहर लाने की प्रक्रिया पूरी हुई । विभिन्न श्रद्धालु परिवारों ने कलशाभिषेक, शांतिधारा और पूजन किए । मंदिर समिति के अनुसार यह दुर्लभ अवसर 27 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगा. हर दिन सुबह गुरु भक्ति, पाद पक्षालन, प्रवचन और महामस्तकाभिषेक के साथ कार्यक्रम होंगे, जबकि शाम को महाआरती और भक्ति संध्या आयोजित की जाएगी । अंतिम दिन यानी 27 अप्रैल को विधि-विधान के साथ इन सभी प्रतिमाओं को पुनः भू-गर्भ स्थित चैत्यालय में विराजमान किया जाएगा ।

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SJK News Chief Editor (SJK News)