भारत को सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनना है : भागवत

बोले-दुनिया ताकत की भाषा समझती है; विश्व गुरु भारत कभी भी युद्ध का कारण नहीं बनेगा

Jul 27, 2025 - 21:40
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भारत को सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनना है : भागवत

कोच्चि. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें फिर से सोने की चिड़िया नहीं बनना है, बल्कि हमको शेर बनना है। दुनिया शक्ति की ही बात समझती है और शक्ति संपन्न भारत होना चाहिए।  उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए और उसे कहीं भी अपने दम पर जीवित रहने की क्षमता प्रदान करे। भागवत ने ये बातें केरल में शिक्षा सम्मेलन ज्ञान सभा में कहीं। उन्होंने कहा-हमेशा ह्यभारतह्ण ही कहना चाहिए, कि इसका अनुवाद करना चाहिए। विकसित, विश्व गुरु भारत कभी भी युद्ध का कारण नहीं बनेगा। मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य के पास भगवान या राक्षस बनने का विकल्प है। राक्षस बनकर वह अपनी और दूसरों की जिंदगी बर्बाद करता है, जबकि भगवान बनकर वह स्वयं और समाज का उत्थान करता है।

 शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को सही दिशा में ले जाना है, ताकि वह भूखा रहे और आत्मनिर्भर बन सके। शिक्षा केवल आजीविका तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यक्ति को नैतिक और सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाए।  भागवत ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत और विश्व गुरु भारत कभी युद्ध का कारण नहीं बनेगा, बल्कि यह विश्व में शांति और समृद्धि का संदेशवाहक होगा। भारत की यह पहचान उसकी शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक मूल्यों से और मजबूत होगी।

            पश्चिमी दृष्टिकोण से लिखा इतिहास पढ़ाया जा रहा

भागवत बोले-आज जो इतिहास पढ़ाया जाता है, वह पश्चिमी दृष्टिकोण से लिखा गया है। उनके विचारों में भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। विश्व मानचित्र पर भारत दिखता है, लेकिन उनकी सोच में नहीं। उनकी किताबों में चीन और जापान मिलेंगे, भारत नहीं। आरएसएस चीफ ने कहा, 'पहले विश्व युद्ध के बाद शांति की बातें की गर्इं, किताबें लिखी गर्इं और राष्ट्र संघ बना, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध हुआ। फिर संयुक्त राष्ट्र बना, लेकिन आज भी लोग चिंतित हैं कि कहीं तीसरा विश्व युद्ध हो जाए।

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SJK News Chief Editor (SJK News)