आचार्य नवीन नंदी गुरुदेव का हुआ केश लोच
जयपुर : जैन धर्म में आचार्य, मुनि और साध्वियों द्वारा शरीर व सांसारिक मोह-माया के प्रति आसक्ति मिटाने के लिए केश लोचन (बालों को हाथों से उखाड़ने की क्रिया) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कठिन तप है। इसे आत्म-शुद्धि का प्रतीक माना जाता है । आचार्य नवीन नंदी गुरुदेव का हुआ केश लोच प्राचीन आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, दहमीं कलां मे संपन्न हुआ।
ट्रस्ट के अध्यक्ष कुलदीप चौधरी एवं मंत्री प्रमोद बाकलीवाल ने बताया केश लोच की यह प्रक्रिया केवल और केवल जैन धर्म के साधुओं द्वारा ही की जाती है, ये चार महीनें मे एक बार अनिवार्य होती है। इसमें सिर और दाढ़ी के बालों(केश) का लोचन साधु अपने हाथों से करते है और इसमें पीड़ा का भाव बिल्कुल नहीं होता। वहीं दूसरी और श्रावकों की आँखे नम थी और लगातार भजन और नमोकार का जाप कर रहे थे। ट्रस्ट के अमित जैन और रविंद्र जैन ने बताया इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा:- संसार की सभी जीव स्वार्थी है जब तक स्वार्थ की पूर्ति नहीं होती तब तक उसकों सब अच्छे लगते है और जैसे ही स्वार्थ की पूर्ति होती है वैसे ही बुरे लगाना शुरू हो जाते हैं। संगठन मंत्री गौरव जैन ने बताया कार्यक्रम मे प्रबंध ट्रस्टी महावीर पाटनी ,बरकत नगर के मंत्री एवं समिति के मंत्री मनोज पाटनी,मनीष जैन सी. ए. पंडित सुनील जैन, वैभव जैन नवले, एवं सभी बगरू एवं जयपुर के भक्त उपस्थित थे।
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