सच्ची श्रद्धा सम्यग दर्शन हैं : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
स्वस्ति धाम में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल प्रवेश में उमड़ा जनसैलाब निवाई के सेकंडों श्रद्धालुओं ने स्वस्ति धाम पर चढ़ाया श्री फल अर्ध
निवाई - जहाजपुर- प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागर महाराज की अगुवानी गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने की जिसमें माताजी ने आचार्य वंदना ओर आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर अगुवानी की। अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज का मंगल विहार चल रहा है विहार कार्यक्रम बिजोलिया से चलकर 25 जून को स्वस्ति धाम जहाजपुर पहुंचे जहां मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों एवं ज्ञानेंद्र जैन भानू जैन विमल पाटनी ज्ञानचंद सोगानी विनय कासलीवाल विमल सोगानी एडवोकेट अशोक बाकलीवाल कमलेश जैन, विमल जौंला, सुनील भाणजा अरुण लटुरिया दिलीप भाणजा गोपाल कठमाणा जयकुमार जैन सुशील कटारिया गोलू कटारिया प्रभा कटारिया महेन्द्र चंवरिया सुशील गिन्दोडी़ मोहित चंवरिया सहित अनेक लोगों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन करके अगुवानी की। पूज्य आर्यिका माताजी श्री स्वस्ति भूषण माताजी अन्य साधुओं एवं प्रियंका दीदी एवं किशोर जैन इंदौर ने जहाजपुर मंदिर आगमन पर आचार्य श्री के 9 प्रकार के रत्नों केशर से चरण प्रक्षालन किये। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि
प्रथमाचार्य शांति सागर महाराज ने चारित्र के 6 खण्डों पर विजय प्राप्त की थी। शांति सागर जी ने धर्म ओर संस्कृति की रक्षा की। जीवन में धर्म को अपना कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर ने स्वस्ति धाम जहाजपुर में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की। आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि न्याय और नीति से अर्जित द्रव्य को दान देना चाहिए दान धर्म कार्य में देना चाहिए।समवशरण मंदिर धर्म का प्रतीक है जिन बिंब दर्शन से सम्यक ज्ञान होता है। गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने सम्यक दर्शन ज्ञान चारित्र की विवेचना की।सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है। माताजी ने बताया कि सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है लौकिक ज्ञान से प्रसिद्धि मिलती है किंतु रत्नत्रय धर्म से सिद्धि प्राप्त होती है। जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला एवं हितेश छाबड़ा ने बताया कि 27 जून को 36 वां आचार्य पदारोहण समारोह जहाजपुर में मनाया जाएगा जहां अनेक नगरों से भक्त चातुर्मास का पुनः निवेदन करेंगे। आचार्य श्री स्वस्ति धाम पर 27 जून को वर्ष 2025 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे।
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