मन, वचन, कर्म में भी अहिंसा होना जरूरी : कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
उपवास से मन की शुद्धि तो होती ही है तन भी शुद्ध बना रहता है उपवास के वैज्ञानिक कारण भी साबित हो चुके
जयपुर। दिगम्बर जैन संत हजारों उपवास एवं निराहार मौन साधना करने वाले साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज जयपुर पधारे। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपने संबोधन में कहाकि यहां आकर मुझे एक ऐसी विचारधारा से जुड़ने का अवसर मिला है जो संयम भी सिखाती है और जीने की शैली भी।
यह वो विचारधारा है जो मात्र एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे समाज, देश और पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा कि महाराज सा का मौन अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है लेकिन आज यहां आकर उनका संदेश सुनने का सौभाग्य बहुत बड़ा है।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि पूरे देश-दुनिया को नैतिकता का संदेश देने वाले जैन समाज ने बहुत बड़ा दायित्व का भार अपने कंधों पर उठाया है, इसकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।
उन्होंने कहा कि अहिंसा का आशय केवल किसी को चोट न पहुंचाना ही नहीं है बल्कि अपने मन, वचन, कर्म में भी अहिंसा होना जरूरी है। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि जब हम संयम की बात करते हैं तो संयम ऐसा होना चाहिए कि कम हो तो भी संतुष्टि हो और अधिक हो तो ये सादगी में झलकना चाहिए और उपवास की बात यहां हो रही है तो उपवास के शरीर को भी फायदे होते हैं तो मन के फायदे भी उतने ही हैं। उन्होंने कहा कि सैनिक और खिलाड़ी होने के नाते मैं भी उपवास रखता हूं इससे मन की शुद्धि तो होती ही है तन भी शुद्ध बना रहता है। उपवास के वैज्ञानिक कारण भी साबित हो चुके हैं।
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