आस्था, इतिहास और चमत्कारों से भरा जिनालय
भांकरोटा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर: 1000 वर्ष पुरानी प्रतिमा के अतिशय का केन्द्र
जयपुर- अजमेर हाईवे (NH-8) पर भांकरोटा बस स्टैंड से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (अतिशय क्षेत्र) जैन समाज की आस्था का प्रमुख केन्द्र। यहाँ विराजमान मूलनायक भगवान श्री 1008 चिन्तामणि पार्श्वनाथ की प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी है, जबकि जिनालय का इतिहास 500- वर्ष पुराना बताया जाता है।
मौखिक साक्ष्यों के अनुसार, भांकरोटा क्षेत्र कभी अत्यंत समृद्ध जैन समाज का गढ़ था। समय के साथ पलायन और उपेक्षा के कारण जिनालय की देखरेख कम हो गई। एक समय प्रतिमा को गोपाल जी का रास्ता स्थित जैन मंदिर ले जाया गया, जिसके बाद वहाँ लगातार अमंगलकारी घटनाएँ होने लगीं। समाज को अपनी गलती का आभास हुआ और गाजे-बाजे के साथ रथ यात्रा निकालकर प्रतिमा को पुनः भांकरोटा जिनालय में विराजमान किया गया। तब जाकर घटनाएँ शांत हुईं।
इतिहास में यह भी दर्ज है कि एक बार चोर प्रतिमा को चुरा ले गए, किंतु वह चोर तत्काल अंधा हो गया। घबराकर उसने मूर्ति को यथास्थान रख दिया। इसके बाद से ही इस प्रतिमा के अतिशय की ख्याति और बढ़ी। यहाँ कई बार चमत्कारिक घटनाएँ हुईं, जिनमें स्वतः केसरिया जल से भगवान के अभिषेक का होना प्रमुख है।
करीब 50 वर्षों से स्व. श्री सुरेन्द्र जी काला ने तन-मन-धन से सेवा कर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और उनके ही प्रयासों से जैन धर्मशाला का निर्माण भी हुआ। यह जिनालय आज श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कारों का केंद्र है, जहाँ लोग अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करने की भावना से आते हैं।
यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जैन समाज के जिनशासन की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदा
हरण है।
What's Your Reaction?

