काश्तकारो को मिली राहत, सोसाइटी का दावा कोर्ट ने किया खारिज

न्यायालय ने ना तो समिति का कब्जा माना और ना ही इकरारनामा

May 15, 2026 - 15:44
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काश्तकारो को मिली राहत, सोसाइटी का दावा कोर्ट ने किया खारिज
काश्तकारो को मिली राहत, सोसाइटी का दावा कोर्ट ने किया खारिज

जयपुर । सांगानेर स्थित अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रम 10 ने मीनावाला ग्रह निर्माण सहकारी समिति का दावा खारिज करते हुए कहा की ना तो समिति अपने इकरारनामा को साबित कर पायी और ना ही अपना क़ब्ज़ा ऐसे में समिति का दावा ख़ारिज किए जाने योग्य है ।  मीनावाला गृह निर्माण सहकारी समिति ने वर्ष 2010  में ग्राम मोहनपुरा तहसील सांगानेर की भूमि 31 बीघा में से 10 बीघा ज़मीन खरीदने का  वर्ष 1996 का एग्रीमेंट होना बताते हुए सन 2010  में काश्तकार सुभाष पुत्र कुंदन मल व अनिल पुत्र कुंदनमल के विरुद्ध संविदा की विशिष्ट अनुपालना एवं स्थायी निषेधाज्ञा का दावा न्यायालय में पेश किया गया था । 

काश्तकार की और से अधिवक्ता विशाल जोशी एवं सतीश भाखर ने न्यायालय में जवाब पेश करते हुए बताया कि काश्तकारो द्वारा मीनावाला समिति को कभी भी ना तो कोई ज़मीन बेची ना ही इकरारनामा किया और ना ही कभी कब्जा ही दिया है आज भी काश्तकार अपनी ज़मीन पर खेती कर जीवन यापन कर रहे है । 

न्यायालय ने सुनवाई के बाद न्यायालय ने माना कि समिति का इकरारनामा रजिस्टर्ड दस्तावेज नहीं है जबकि जहाँ किसी विक्रय इकरार की पालना में क्रयशुदा भूमि लाभ प्रतिफल अदा किया जा चुका है तो ऐसे इकरार का रजिस्टर्ड होना आवश्यक है । कोर्ट ने इकरारनामा करने वाले शिवराम चौधरी के समिति के अध्यक्ष/व्यवस्थापक होने के दस्तावेज पेश नहीं करने के कारण उसे समिति का अधिकृत व्यक्ति नहीं माना । इकरारनामा पर समिति की सील नहीं है और समिति यह भी साबित नहीं कर पायी कि शपथ पत्र में वर्णित प्रतिफल अदायगी इकरारनामा की पालना में की गई हो तथा वादी समिति अपना क़ब्ज़ा भी साबित नहीं कर पायी है ।

न्यायालय ने अपने निर्णय में समिति द्वारा जब 2005  में ही सम्पूर्ण प्रतिफल अदा कर दिया था तो फिर इतने वर्षों तक इकरारनामे की पालना क्यो नहीं करवाई गई इससे भी वादी का दावा कमजोर साबित हो जाता है साथ वादी ने मात्र दस बीघा ज़मीन खरीदने का कथन किया है परन्तु उसकी कोई स्पष्ट पहचान अंकित नहीं की है ना ही दावे में साबित की है इससे समिति का कब्जा लिए जाने का तथ्य माने जाने योग्य नहीं है ।  न्यायालय ने वादी के वादपत्र में अंकित अभिवचनों को साबित करने में समिति को असफल मानते हुए पंद्रह साल बाद समिति का वाद खारिज कर दिया । 

पूर्व में हुआ था वाद खारिज 
मीनावाला गृह निर्माण सहकारी समिति का वाद पूर्व में भी अदम पैरवी में खारिज हो गया था तब भी समिति के कुछ लोगों ने गिरोह बनाकर पुलिस थाना मुहाना की शह से भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया था तब राजस्थान उच्च न्यायालय में मुहाना पुलिस , समिति व अन्य लोगो के विरुद्ध याचिका पेश की गई थी । उसके बाद दावा वापस रिस्टोर हो गया था एवं अब पूर्ण सुनवाई के बाद दावा मैरिट पर खारिज हुआ है । 

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SJK News Chief Editor (SJK News)