समाज ,संगठन में कैंची नहीं सुई बनकर कार्य करें :आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य पद के शताब्दी महोत्सव के साथ आचार्य श्री वीर सागर जी की मुनि दीक्षा का शताब्दी महोत्सव भी मनाया जा रहा हैं।

Sep 21, 2025 - 22:45
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समाज ,संगठन में कैंची नहीं सुई बनकर कार्य करें :आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
समाज ,संगठन में कैंची नहीं सुई बनकर कार्य करें :आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
समाज ,संगठन में कैंची नहीं सुई बनकर कार्य करें :आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोंक : संसारी प्राणी जन्म लेता है, वह जीवन निर्माण के लिए अनेक कार्य करता है चाहे वह विद्यार्थी हो नेता हो या डाक्टर हो, इंजीनियर हो इन सब लोग के कार्यों से संसार में परिभ्रमण होता रहता है जो जन्म लेकर जीवन निर्माण के लिए धार्मिक कार्य करते हैं संयम धारण करते हैं उनका संसार में भ्रमण कम होता है । आचार्य श्री वीर सागर जी गृहस्थ अवस्था से नाम अनुरूप अनुपम हीरा रहे। जिस प्रकार हीरे को निखारने के बाद उसकी कीमत बहुमूल्य होती है उन्होंने भी लौकिक शिक्षा धार्मिक शिक्षा तप स्वाध्याय से जीवन को निखारने का प्रयास किया। उन्होंने धार्मिक तप ,त्याग स्वाध्याय को जीवन में आत्मसात किया। त्याग भी तप है ।

अभी दिगंबर साधुओं का समागम सानिध्य सुगमता से मिल रहा है पहले गुरु नहीं थे उन्होंने गृहस्थ यौवन अवस्था में इंद्रिय भोगों पर नियंत्रण कर चार रस, घी ,तेल, मीठा और नमक का त्याग कर दिया था, तथा ऐलक श्री पन्नालाल जी से 7 ब्रह्मचर्य प्रतिमा अंगीकार की। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी के 68 में समाधि अंतर विलय वर्ष पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि आपने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज से सन 1924 में मुनि दीक्षा ली आप प्रथम शिष्य होने के नाते उनकी समाधि के बाद प्रथम पट्टाचार्य लिखित पत्र अनुसार घोषित हुए।

आपने अनेक दीक्षाएं दी श्री शिव सागर जी, श्री धर्मसागर जी आचार्य कल्प श्रुतसागर जी को मुनि तथा आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी सहित अनेकों को आपने दीक्षा दी थी।इसी प्रकार आर्यिका श्री इंदुमती, श्री ज्ञानमति, श्री सुपार्श्व मति आदि प्रमुख शिष्य शिष्याएं है। वर्तमान में एक मात्र आर्यिका श्री ज्ञान मति जी संयम साधना कर रही हैं। दिगंबर मुनि आध्यात्मिक संपदा के धनी होते हैं वह उनके पास आचार्य पद की संपदा, शास्त्र स्वाध्याय की संपदा वचन की संपदा, और शिष्यों के संग्रह की संपदा होती हैl दीक्षा गुरु प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने संलेखना लेते समय लिखित पत्र के द्वारा अपना आचार्य पद श्री प्रथम शिष्य श्री वीर सागर जी को सन 1955 में दिया। आपकी समाधि वर्ष 1957 जयपुर में हुआ। समाज एकता संगठन के लिए कैंची के बजाय सुई बनने की प्रेरणा देते थे ।

 आचार्य पद के शताब्दी महोत्सव के साथ आचार्य श्री वीर सागर जी की मुनि दीक्षा का शताब्दी महोत्सव भी मनाया जा रहा हैं।प्रवचन के पूर्व प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के प्रथम मुनि शिष्य प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी का 58 वा समाधि दिवस उन्हीं की परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में वृहद 58 सामग्री के साथ पूजन जिनवाणी मंडल ओर समाज द्वारा किया गया पूजन आर्यिका श्री महायश मति जी द्वारा कराई गई। इसके बाद वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन की गई।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य श्री राज कुमार प्रतापगढ़ को सपरिवार प्राप्त हुआ।आर्यिका श्री महायश मति जी ने बताया कि पूर्णिमा को जन्म हुआ और समाधि अमावस्या को हुआ।अनेक दीक्षाएं दी वर्तमान में आर्यिका श्री ज्ञान मति जी वर्तमान में संयम साधना कर रही हैं आचार्य श्री वीर सागर जी एवं श्री शिव सागर जी नैनवा चातुर्मास के बाद टोंक भी आए थे आर्यिका श्री देशना मति जी, श्री विलोक मति जी , आर्यिका श्री शुभ मति माताजी ने श्री वीर सागर जी कल्पवृक्ष चिंतामणि रत्न निरूपित किया मुनि श्री मुमुक्षु सागर मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी श्री प्रभव सागर जी ने गुणानुवाद किया।इस अवसर पर अनेक नगरों से भक्त पधारे।

वात्सल्य वारिधि वर्धमान वर्षायोग समिति के मंत्री राजेश सर्राफ एवं प्रवक्ता पवन कंटान ने बताया की वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 वर्धमान सागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य एवं आशीर्वाद से 20वीं सदी के दिगंबर जैन प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री 108 शांति सागर जी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठा शताब्दी समारोह 2024 25 

दिनांक 3अक्टूबर एवं 4अक्टूबर को RN गार्डन महावीर नगर में मनाया जाएगा जिसमें एक भव्य शोभा यात्रा शाही लवाजमे के साथ निकाली जाएगी जो अहिंसा सर्किल से सवाई माधोपुररोड तक होगी उसके पश्चात 108 परिवारों के द्वारा 108 विधान की रचना होगी जिसमें इंद्र इंद्राणी पुजा अर्चना करेंगे इस कार्यक्रम को सफल आयोजन बनाने के लिए लगभग 300 से अधिक युवा वर्ग इसमें जुड़े हुए हैं जिसकी तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं

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SJK News Chief Editor (SJK News)