"मंदिर में शालीन वेशभूषा और अनुशासन अपनाएँ – आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज
"महामंत्र का जाप करें, मोबाइल व अनुचित वेशभूषा से दूर रहकर बढ़ाएँ पुण्यार्जन"
टोंक: आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहां की आप गृहस्थ हो रागी द्वेषी हो लेकिन मंदिर में भगवान के सामने इस तरह की वेशभूषा का ध्यान रखें, व धर्म तथा राग द्वेष को कम करने के लिए महामंत्र की जाप्य करना चाहिए इस बात को भी ध्यान देना पड़ेगा कि कौन से कार्य को नहीं करें जो कार्य घर पर करते हो लेकिन मंदिर या जिनालय में आकर वह काम ना करें ऐसे वस्त्र आदि भी पहनकर मंदिर या जिनालयों में आ जाते हैं उसमें बहुत बुरा लगता है
राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि जो आजकल की वेश भूषा है उसको मंदिरों मे पहन कर नहीं आवे विशेष रूप से महिला एवं बालिकाएं शरीर को ढककर आए एवं पुरुष भी मंदिर में अभिषेक के समय अपने सर को ढक कर आए और मंदिर में जब तक रहे तब तक सर को ढक के रखे एवं मंदिर में मोबाइल का उपयोग जो खिलौने लेकर आते हैं
वह मोबाइल को घर पर ही रख कर आए इसका विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए और यह नियम लेना चाहिए कि जब तक हम मंदिर में रहेंगे तब तक इसका उपयोग नहीं करेंगे और लोग यह समझ नहीं पाते इससे पुण्यार्जन तो कम होगा लेकिन पापार्जन अधिक होगा । मनुष्य को राग एवं द्वेष कम करने के लिए महामंत्र की जाप्य अवश्य करना चाहिए ।
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