टोंक की धरा पर तीन आचार्य संघों का ऐतिहासिक मिलन
वीतरागी से वीतराग होना ही सच्चा मार्ग : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का टोंक में भव्य मंगल प्रवेश, तीन आचार्य संघों का ऐतिहासिक मिलन
टोंक। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के शिष्य, मासोपवासी राष्ट्र गौरव अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज संसंघ का टोंक नगर में भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा तथा पूरे नगर में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।
जैन समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य संघ का मंगल जुलूस इंदिरा सर्किल छावनी से गाजे-बाजे के साथ रवाना होकर घंटाघर, सुभाष बाजार, पांचबत्ती, काफला बाजार, नौशे मियां का पुल होते हुए बड़ा कुआं पहुंचा। यहां आचार्य श्री 108 इन्द्रनंदी जी महाराज संसंघ एवं बालाचार्य निपुण नंदी जी महाराज संसंघ के साथ आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का मंगल मिलन हुआ। इस अवसर पर तीन आचार्य संघों (29 पिच्छिका) का ऐतिहासिक संगम हुआ।
मंगल मिलन के दौरान अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने आचार्य इन्द्रनंदी जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर चरण वंदना की तथा तीन प्रदक्षिणाएं देकर विनयपूर्वक श्रद्धा अर्पित की। इसके पश्चात तीनों आचार्य संघ श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन नसियां जी पहुंचे, जहां समाजजनों द्वारा पाद प्रक्षालन, आरती एवं हाईटेक मशीनों से पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। नगर में विभिन्न स्थानों पर स्वागत तोरण द्वार सजाए गए तथा श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती एवं चरण प्रक्षालन कर अगवानी की।
मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने “जैन साधु देख लो, त्याग करना सीख लो” तथा “स्वागत की है तैयारी, आ रहे हैं पुष्पदंत धारी” जैसे जयघोषों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
जुलूस श्री आदिनाथ दिगम्बर नसियां जैन मंदिर पहुंचा, जहां आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने मूलनायक भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ के दर्शन-पूजन कर धर्मसभा को संबोधित किया। धर्मसभा से पूर्व मुनि नेगम सागर महाराज द्वारा मंगलाचरण किया गया तथा उपाध्याय पीयूष सागर महाराज एवं मुनि सहज सागर महाराज ने भी अपने उद्बोधन दिए।
अपने प्रवचन में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि “राग से राग करोगे तो दुख मिलेगा और वीतराग से भी आसक्ति रखोगे तो दुख रहेगा। वीतरागी से वीतराग होना ही सच्चा मार्ग है, जिससे नरक भी स्वर्ग बन सकता है।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान की वाणी को श्रद्धा से सुनता है, उसके भीतर भगवान का वास हो जाता है। आचार्य श्री ने टोंक को धर्मनगरी बताते हुए कहा कि यहां के श्रद्धालु दिगम्बर संत परम्परा और साधु चर्या में गहरी आस्था रखते हैं। उन्होंने रात्रि भोजन का त्याग करने का संदेश देते हुए इसे महापाप बताया तथा संयमित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
दोपहर में आचार्य श्री का दरबार आयोजित हुआ, जिसमें आचार्य प्रसन्न सागर महाराज, उपाध्याय पीयूष सागर महाराज, मुनि सहज सागर महाराज एवं मुनि नेगम सागर महाराज के मुखारविंद से संगीतमय पूजा-अर्चना सम्पन्न हुई। सायंकाल आरती, शास्त्र सभा एवं आनंद यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें निवाई, इंदौर एवं लावा सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पूजन किया।
कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष पदमचंद आंडरा, भागचंद फूलेता, कमल आंडरा, विमल बरवास, धर्मेंद्र पासरोटिया, राजेश सर्राफ, अनिल सर्राफ, नीटू छामुनिया, कमल सर्राफ, पंकज फूलेता, पंकज छामुनिया, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, मुकेश बरवास, अम्मू छामुनिया, राजेश अरिहंत, अशोक छाबड़ा, नेमीचंद बनेठा, मुकेश बनेठा, जीतू बनेठा, सोनू पासरोटिया, पुनीत जागीरदार, अम्मू संघी, मुकेश दतवास, अर्पित पासरोटिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे
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