क्षुल्लक विशाल सागर महाराज का निर्माण से महानिर्वाण हुआ
टोंक - सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में क्षुल्लक विशाल सागर महाराज को आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने केंश लोचन के साथ मुनि दीक्षा दी। इस दौरान आचार्य श्री ने मुनि विशाल सागर महाराज का विधिवत मंत्रोच्चार करते हुए केसर एवं लोंग द्वारा दीक्षा संस्कार दिये। जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान एवं विमल जौंला ने बताया कि इस दौरान दीक्षा कार्यक्रम दिगम्बर जैन अमीरगंज नसियां में हजारों श्रद्धालुओं के बीच क्षुल्लक विशाल सागर महाराज की मुनि दीक्षा हुई आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने नव दीक्षीत मुनि विशाल सागर महाराज के नाम से नामांकरण किया गया। विकास जागीरदार एवं राकेश संधी ने बताया कि इस दौरान क्षुल्लक महाराज की 1.35 पर मुनि दीक्षा हुई मुनि दीक्षा के उपरांत लगभग 3 बजे नवदीक्षित मुनि विशाल सागर महाराज का समाधि मरण हुआ। समाधि मरण का चकडोल यात्रा दिगम्बर जैन अमीरगंज नसियां से आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सानिध्य में हजारों श्रद्धालुओं के साथ गाजे बाजे से निकाली गई जो मुख्य मार्गों से होती हुई समाधि स्थल पर पहुंची जहां विद्वानों पण्डितो एवं आचार्य श्री द्वारा संस्कार विधि द्वारा अन्तिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर समाज के प्रवक्ता अध्यक्ष पदम चंद आंडरा मंत्री महावीर प्रसाद देवली चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष भागचंद फुलेता धर्म चंद दाखिया मंत्री राजेश सर्राफ राजेश बोरदा कमल सर्राफ नरेंद्र छामुनिया ओम ककोड़ विकास अत्तार सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे। क्षुल्लक विशाल सागर महाराज का 2015 में किशनगढ़ में क्षुल्लक दीक्षा हुई
27 जूलाई रविवार 2025 दोपहर 1.35 पर टोंक नगर में मुनि दीक्षा हुई नव दीक्षित मुनि विशाल सागर महाराज के गृहस्थ अवस्था की पत्नी वर्तमान में संघ में श्री विचक्षण मति माताजी और सासू मां ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से पूर्व में दीक्षा ली है
जोबनेर नगर से यह 5 वीं दीक्षा है 36 वर्ष के आचार्य काल में 117 वी दीक्षा हैं
निर्माण से निर्वाण तक
टोंक की पावन धरा पर विराजमान वात्सल्य वारिधि परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जिनकी दूर दृष्टि आज टोंक की भूमि पर सभी ने अपने आंखों से देखी व कानों से सुनी। जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान एवं विमल जौंला ने बताया कि पंचम काल मे भी ऐसे अद्भुत और विरले संत विराजमान है जो आने वाले भविष्य को पहले ही जान लेते हैं दिगंबर जैन नसिया हमीरगंज में सभी ने एक स्वर से कहा की जय हो आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज जो जीवंत चमत्कार के पुंज हैं वाक्य था, क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी महाराज को मुनि दीक्षा देने का। जैन पत्रकारों की गोष्ठी शांति समागम के नाम से चल रही थी कि तभी आचार्य भगवान ने जान लिया कि एक संत निर्वाण को प्राप्त होने वाले हैं और आनन फानन में उन्होंने मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि विशाल सागर महाराज नामकरण किया।
चमत्कार तब हुआ जब दीक्षा बड़ी समता भाव के साथ संपन्न हुई उपस्थित जन समुदाय ने अपनी आंखों से केश लोंच करते हुए नवदीक्षार्थी महाराज को देखा और कोई भी यह नहीं कह सकता था कि आने वाले क्षण में ही उनकी समाधि हो जाएगी। दीक्षा के मात्र 15 मिनट पश्चात ही मुनि विशाल सागर महाराज समता पूर्वक समाधि मरण को प्राप्त हुए। धन्य है ऐसे चमत्कारी दिव्य संत जो आज इस कलयुग में ही विराजमान है।
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