विनय गुण मोक्ष का द्वार : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
कोमलता ,निर्मलता ,विनय उत्तम मार्दव धर्म है।मान जहर हैं, नम्रता,सरलता अमृत हैं
टोंक : धर्म सभा में प्रवचन में आचार्य श्री ने बताया कि मार्दव धर्म कोमलता का सूचक है नर्म मिट्टी को कुंभकार मनचाहा रूप देता हैं आप भी जीवन में सरलता कोमलता से जीवन को मनचाहा आकार दे सकते हो,कृषक फसल लेने के बाद खाली खेत को धूप में तपा कर हल चलाकर नर्म बनाकर फसल के लिए तैयार करता हैं। क्रोध मान से जीवन में विकृति आती हैं मान ऐसी मीठी कषाय है ,जिसके कारण व्यक्ति भीतर भीतर झुलसता रहता है। जो जितना झुकता है वह उतना ही ऊंचा उठता है विनय गुण से मोक्ष का द्वार खुल जाता है ।विनय के अभाव में संपूर्ण शिक्षा निरर्थक है ,विनय के अभाव में सम्यक दर्शन नहीं रह सकता है। अभी मुनि श्री ने 8 मद की जानकारी दी।
जो कुल, रूप ,जाति, बुद्धि ,तप, श्रुत और शील आदि के विषय में थोड़ा सा भी किंचित मात्र भी गर्व नहीं करता है ,उसके पास मार्दव धर्म प्रगट होता है। वह मार्दव धर्म का धारी होता है । यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की विवेचना करते हुए प्रकट की राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आगे बताया कि मान जहर हैं नम्रता, सरलता विनय अमृत समान सुख देते हैं विनय मोक्ष का द्वार है। कुएं से बाल्टी झुकाने पर पर ही पानी आता है इस कारण जीवन में नम्रता जरूरी है। बड़प्पन लघुता से मिलता हैं और लघुता से प्रभुता मिलती हैं अभिमान और स्वाभिमान में अंतर है स्वाभिमान आत्मा का धर्म का,जैन कुल का होना चाहिए।
मार्दव भाव आत्मा का गुण है मोक्ष सुख का कारण है यह मार्दव धर्म अहंकार का नाशक है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री चिंतन सागर जी ने उपदेश में बताया कि दश धर्म मुनियों और श्रावकों दोनों के लिए होते हैं जिस प्रकार दुकान व्यापार में ग्राहक पर नाराज नहीं होकर नर्म रहते हो उसी प्रकार जीवन में अभिमान मद को स्थान नहीं देना चाहिए।सभी धर्मों को उद्देश्य उत्तम होने से सभी धर्मों के आगे उत्तम लगाया जाता हैं।इसके पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में विधानाचार्य कीर्तिय जी के निर्देशन में श्री जी का पंचामृत अभिषेक शांतिधारा पुण्यार्जक परिवार द्वारा की गई । नित्य पूजन के बाद इंद्रध्वज महामंडल विधान में अकृत्रिम जिनालयों केभगवान की पूजन सौधर्म इंद्र सहित सभी पात्र इंद्र परिवार द्वारा की गई। पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार संघ की आहारचर्या के बाद दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा तत्वार्थ सूत्र की विवेचना की गई। प्रतिदिन मुनि श्री चिन्मय सागर जी सहित अनेक साधुओं और श्रावक श्राविकाओं द्वारा उपवास व्रत आराधना कर कर्मों की निर्जरा की जा रही हैं।शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री की आरती के बाद स्थानीय महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए ।
भादव शुक्ल सप्तमी उत्तम आर्जव धर्म दिवस सन 1950 में जन्मे पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 75 वा"हीरक जन्म जयंती महोत्सव समाज को मनाने का अवसर मिला है।इस अवसर पर पुण्यशाली परिवार द्वारा चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की जाकर 75 द्रव्यों विभिन्न फल ,फूल नैवेद्य ,सूखे मेवे ,श्रीफल आदि से आचार्य श्री की भक्ति संगीतमय पूजन की जावेगी। इस अवसर पर देश के अनेक नगरों से भक्त भी आ रहे है।
समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार आज दसलक्षण के प्रथम दिवस आचार्य श्री के सानिध्य में प्रात काल की बेला में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई । इसके पश्चात इंद्रध्वज मंडल विधान में द्वितीय दिवस उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई । इसके अंतर्गत प्रति इंद्र बनने का सौभाग्य श्रेष्ठी विनीत जैन, श्रेष्ठी प्रदीप कुमार पीयूष कुमार नगर वाले,श्रेष्ठी रमेश चंद, विमल कुमार फूलेता, श्रेष्ठी ज्ञानचंद बंथली,श्रेष्ठी चंद्र प्रकाश धुंआ वाले,श्रेष्ठी धर्मचंद ककोड़, श्रेष्ठी जय कुमार धोली वाले,श्रेष्ठ कन्हैया लाल गुराई वाले, श्रेष्ठी शंभु लाल, रमेश चंद रोहतक वाले,श्रेष्ठी महेश कुमार बिलासपुरिया,श्रेष्ठी कैलाश चंद, धर्मचंद संघी, श्रेष्ठी मुकेश कुमार, जीतेंद्र कुमार मित्तल, श्रेष्ठी पारसमल, गंभीरमल, सुरेश कुमार नमक वाले, श्रेष्ठी प्रकाश सेठी, श्रेष्ठी महावीर प्रसाद, धर्मचंद दाखिया, श्रेष्ठी महावीर प्रसाद धर्मचंद पासरोटिया, श्रेष्ठी विकास जैन सूथड़ा वाले, श्रेष्ठी सुगन चंद पासरोटिया,श्रेष्ठी पारसचंद, अनिल, सुनील, कमल सर्राफ, श्रेष्ठी कमलेश कुमार, बेनी प्रसाद कल्ली, श्रेष्ठी मनीष कुमार, राहुल कुमार धुंआ वाले परिवार को मिला ।
चातुर्मास पत्रिका का विमोचन
श्री दिगंबर जैन नसिया अमीरगंज में आज शुक्रवार को इंद्र ध्वज मंडल में विराजमान श्रीजी की 458 प्रतिमाओं के समक्ष चातुर्मास पत्रिका का विमोचन वात्सल्य वारिधी वर्षायोग समिति, प्रबंध कारणी समिति, समस्त इंद्र व इंद्राणियो द्वारा किया गया ।जिसमे आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी गई ।
What's Your Reaction?

