प्यावड़ी में दो दिवसीय जिन मंदिर शिलान्यास

स्वस्तिभूषण माताजी का 30 वा दीक्षा महोत्सव कार्यक्रम शुरू तीन दिन में तीन बार देवकृत चमत्कार, खनखनाते हुए आया रजत सिक्का, उड़ती-उड़ती आई केसर

Jan 22, 2026 - 18:50
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प्यावड़ी में दो दिवसीय जिन मंदिर शिलान्यास
प्यावड़ी में दो दिवसीय जिन मंदिर शिलान्यास
पीपलू। आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज 108 ससंघ के सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद तथा स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के मंगल सान्निध्य एवं निर्देशन में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, प्यावड़ी (पीपलू) में दो दिवसीय भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव का आयोजन गुरुवार से प्रारंभ हुआ। जैन अतिशय क्षेत्र समिति प्यावड़ी के तत्वावधान में 23 जनवरी को भव्य जिन मंदिर निर्माण को लेकर शिलान्यास किया जाएगा तथा गुरु मां स्वस्तिभूषण माताजी का 30वां दीक्षा महोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए टोंक जिले सहित देशभर से हजारों श्रद्धालु प्यावड़ी पहुंचे हैं।
भव्य शोभायात्रा, महामंडल विधान का आयोजन
आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के निर्देशन में पंडित मनोज शास्त्री, कपिल भैया, दीपक आदि के द्वारा मंत्रोच्चार के साथ चंद्रप्रभु महामंडल विधान संपन्न हुआ। इस दौरान 115 अर्घ्य, 5 महाअर्घ्य एवं 5 जयमाला के अर्घ्य अर्पित किए गए। विधान में सोधर्म इंद्र-इंद्राणी सहित 200 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य चढ़ाए। इससे पूर्व विशाल मंगल जुलूस निकाला गया, जिसमें पांच घोड़ी, एक बग्गी पर पुण्यार्जक सवार थे। युवा ध्वज-पताकाएं लहराते हुए चल रहे थे, महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए थीं तथा युवतियां नृत्य करती हुई शोभायात्रा में सम्मिलित हुईं।
तीन दिन में तीन बार अतिशय, श्रद्धालु भावविभोर
वर्तमान में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी की उपस्थिति में 20 जनवरी 2026 को दो रजत सिक्के, 21 जनवरी को केसर, तथा 22 जनवरी की सुबह खनखनाते हुए रजत सिक्का एवं केसर का अतिशय देखने को मिला।
लगातार तीन दिनों में घटित इन देवकृत चमत्कारों से सम्पूर्ण जैन समाज भावविभोर है। आज प्यावड़ी जैन अतिशय क्षेत्र श्रद्धा, परंपरा, चमत्कार और साधना का ऐसा जीवंत केंद्र बन गया है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।
अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है प्यावड़ी
प्यावड़ी एक अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है, जहां वेदी पर मूलनायक मनोहारी चंद्रप्रभु भगवान की दिव्य प्रतिमा विराजमान है, जो करीब 800 वर्ष से अधिक प्राचीन एवं ऐतिहासिक बताई जाती है। यहां भगवान के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं के अंतर्मन में अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
करीब छह वर्ष पूर्व अभिषेक के दौरान यहां एक अलौकिक चमत्कार देखने को मिला था, जब चांदी का सिक्का प्रकट हुआ तथा भगवान की नाभि से केसर निकलने का दृश्य सामने आया। इसके पश्चात भी अनेक अवसरों पर, विशेषकर चतुर्दशी एवं पूर्णिमा के दिन प्रातःकालीन अभिषेक के समय, सोने-चांदी के सिक्के स्वतः वेदी पर प्रकट होते हुए देखे गए हैं। कई बार केसर के दर्शन भी हुए हैं, जिससे इस क्षेत्र की अतिशय महिमा और अधिक बढ़ गई है।
70 वर्षों से जीवंत परंपरा
प्यावड़ी जैन अतिशय क्षेत्र से जुड़ी आस्था और परंपरा पिछले लगभग 70 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। जैन समाज के वरिष्ठ नागरिक पदमचंद जैन, ओमप्रकाश जैन एवं राजकुमार जैन ने बताया कि करीब 70 वर्ष पूर्व पीपलू नगर में जैन संत वीर सागर महाराज का आगमन हुआ था। उसी दौरान जैन धर्म की शिक्षा के प्रसार के लिए पंडित चतुर्भुज शास्त्री (औशंगाबाद, मध्यप्रदेश) के मार्गदर्शन में दिगंबर जैन वीर पाठशाला की शुरुआत की गई।
पाठशाला के विद्यार्थियों को सामूहिक रूप से प्यावड़ी जैन अतिशय क्षेत्र ले जाया गया, तभी से वर्ष में एक बार प्यावड़ी जाने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज तक श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
वर्तमान में परंपरा के अनुसार भाद्रपद माह में पर्युषण पर्व के पश्चात दूज के दिन श्रद्धालु प्यावड़ी मंदिर पहुंचकर सामूहिक गोठ का आयोजन करते हैं। बीते छह वर्षों से यहां वार्षिक कलशाभिषेक एवं विभिन्न धार्मिक विधानों का नियमित आयोजन भी किया जा रहा है।
स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया कि वे वर्ष 2021 में 21-22 दिसंबर को यहां आई थीं। उस समय चतुर्दशी के दिन अभिषेक के दौरान सिक्के गिरे थे, परंतु उन्हें प्रारंभ में शंका थी। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि क्षेत्र की प्रसिद्धि के लिए ऐसा किया गया होगा, इसलिए विश्वास नहीं हुआ। दो वर्षों तक कोई चमत्कार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि शायद प्रभु ने उन्हें शंका के प्रायश्चित हेतु पुनः इस स्थान पर बुलाया। इस बार पूर्णिमा भी नहीं थी, फिर भी मंगल प्रवेश के दिन दो रजत सिक्के गिरे। साथ ही 21 जनवरी को केसर तथा 22 जनवरी को रजत सिक्का व केसर का अतिशय उन्होंने स्वयं साक्षात देखा है।

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SJK News Chief Editor (SJK News)