राग द्वेष से दूर रहकर आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करें

आत्मा की रक्षा इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करे:आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

Jul 25, 2025 - 23:38
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राग द्वेष से दूर रहकर आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करें
राग द्वेष से दूर रहकर आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करें

टोंक : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट क्यों आते है, इससे बचने के क्या उपाय हैं, कर्मो का क्या प्रभाव शरीर आत्मा पर होता है अहिंसा , सत्य धर्म का जीवन में क्या महत्व है इसकी प्रवचन में विवेचना की संसारी प्राणी को आपदा या कष्ट से निराशा होती है और वर्तमान में गरीबी दरिद्रता भी आपदा कष्ट है यह देशना वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।

धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन विद्यासागर युवा मंच के के सदस्यों द्वारा द्वारा किया जाकर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की एवं भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया ।एवं सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को कच्ची सब्जियों का त्याग देकर नियम दिलाया ।  

 जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान व विकास जागीरदार अनुसार आचार्य श्री ने बताया श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों ने कष्ट आपदा से दूर होने के लिए धर्म का उपाय बताया है। धर्म उपदेश को सुनकर,धारण कर ग्रहण करना चाहिए । जिस प्रकार इंजीनियर मकान बनाता हैं उसी प्रकार निर्माण ,नाम ओर आयु कर्म शरीर को निर्धारित करते हैं संसार में जन्म मरण से छुटकारे का उपाय धर्म से प्राप्त होता हैं जीवन में अहिंसा का महत्व है राग द्वेष विषय भोगों से आत्म धर्म को हिंसा से बचाने का पुरुषार्थ करना चाहिए।इसका उपाय बताया कि कछुआ जिस प्रकार संकट आने पर शरीर के अंगों को संकुचित नियंत्रित शरीर को कठोर बनाता हैं धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है जीवन में प्राप्त तीर्थंकर कुल से जीवन को उच्च बनाकर मानव जीवन सफल करे। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री देशना मति माताजी का प्रवचन हुआ माताजी ने आठ कर्मों के बारे में बताया । ओर कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करेगा वैसा उसको उसके कर्म का फल अवश्य मिलेगा । मोहनीय कर्म को सबसे खराब कर्म बताया । माताजी ने चार कसाय इनद्रियों के बारे में बताया ।आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं टोंक सहित इंदौर पारसोला निवाई के चौके लगे हैं, पारसचंद, सुरेन्द्र कुमार, नरेंद्र, अंशुल छामुनिया परिवार को आज आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

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SJK News Chief Editor (SJK News)