भोले बाबा भाव के भूखे हैं आडंबर के नहीं: प्रदीप मिश्रा

वीटी रोड मेला ग्राउंड पर श्री शिव महापुराण कथा का चौथा दिन

Mar 24, 2026 - 14:41
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भोले बाबा भाव के भूखे हैं आडंबर के नहीं: प्रदीप मिश्रा

जयपुर। जयपुर परिवार सेवा ट्रस्ट के बैनर तले मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड पर चल रही श्री शिव पुराण कथा के चैथे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वालों की कथा सुनने हजारों का भक्तों का हुजूूम उमड़ा। इस दौरान भक्तों को लुटा दिया भंडार काषी वाले ने....तेरी कृपा की क्या है भरोसा...मानो तो मैं गंगा मां हूं,ना मानो तो मैं बहता पानी.....जैसे भजनों पर बाबा के जयकारे लगाते हुए भक्त भाव विभोर होकर नाचे।भक्तों की इतनी संख्या को देखा कुंभ मेले जैसा माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर कथा सुनाते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वाले ने कहा कि शिव साधना में समय की कमी बाधा नहीं है, भोले बाबा केवल भाव के भूखे हैं, आडंबर के नहीं। सच्चे मन से ‘ओम नम: शिवाय:’ का अल्प जप या जल अर्पण भी फलदायी है, क्योंकि शिव ‘भोलेनाथ’ हैं और वे भक्त का विश्वास देखते हैं। समर्पण और पवित्रता ही सबसे बड़ी साधना है। शिव पुराण और कथाओं के अनुसार, महादेव बहुत भोले हैं और सच्चे भाव से की गई पूजा से तुरंत प्रसन्न होते हैं। यदि समय की कमी है, तो केवल मन में शिव का ध्यान और ‘ओम नम: शिवाय:’ का स्मरण भी संपूर्ण फल देता है। पंडित मिश्रा ने आगे कहा कि साधना में समय निकालने से ज्यादा महत्वपूर्ण महादेव पर अटूट भरोसा रखना है। यदि आपके मन में श्रद्धा है, तो महादेव आपकी पुकार अवश्य सुनते हैं। अगर आप जटिल मंत्र या पूजा नहीं कर सकते, तो सिर्फ शिवलिंग पर एक लोटा जल और थोड़े से अक्षत श्रद्धापूर्वक अर्पित करना ही पर्याप्त है।
उन्होंने आगे कहा कि शरीर अंग कितने भी गंदे हो जाए लेकिन हमारा मन गंदा नहीं हो चाहिए। हमारे भोले बाबा साधना बाहरी सफाई से ज्यादा आंतरिक शुद्धता की मांग करती है। अहंकार का त्याग, सच्चा मन, और कर्म में अच्छाई ही सच्ची शिव पूजा है।जीवन की व्यस्तता के बीच, जब भी समय मिले, महादेव का स्मरण करें। सच्चे भाव से की गई थोड़ी सी भक्ति भी शिव कृपा बरसाती है। शिव को प्रसन्न करने के लिए घंटों की पूजा आवश्यक नहीं है, एक पल का सच्चा समर्पण ही काफी है। माता पार्वती और शिव के संवाद पर बोलते हुए कथावाचक पंडित मिश्राजी ने कहा कि अमरनाथ गुफा में हुए शिव.पार्वती संवाद और माता पार्वती की कठोर तपस्या पर जोर देते हैं। वे पार्वती जी द्वारा शिव जी से सुख.दुख के कारण पूछने और पार्वती के ‘अपणा’ रूप या सूखे बेलपत्र पर तपस्या के माध्यम से अटूट भक्ति का संदेश देते हैं।

शरीर के अंगों पर तिल का महत्व बताया
तिल का महत्व कथावाचक पंडित मिश्राजी बताते हुए शरीर के विभिन्न अंगों पर तिल व्यक्ति के पिछले जन्म के कर्मों, भाग्य और व्यक्तित्व के संकेत होते हैं। तिल को राजयोग और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। उनके उपायों में, विशेष रूप से काले तिल का शिवलिंग पर अर्पण, शनि दोष, राहु-केतु और आर्थिक समस्याओं के निवारण के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस मौके पर तिलकेष्वरी पूजा का महत्व भी बताया।

कथा सुनने से हुआ जटिल समस्याओं का निराकरण
इस दौरान मंच से भुसावर व जयपुर सहित अन्य स्थानों से जिसमें जयपुर से सांगानेर की सुनीता चैधरी,दिनेष कंवर,धोलपुर की सुषमा पंवार,झुंझुुंनूं की अनीता कंवर सहित विभिन्न स्थानों से के आए पत्रों में लिखें अनुभवों को मंच के माध्यम से साझा करते हुए कथावाचक मिश्रा ने कहा कि कथा का नियमित श्रवण करने और एक लोटा जल चढ़ाने से किसी ने परीक्षा पास कर ली और किसी की सरकारी नौकरी लग गई तो किसी का बच्चा बोलने लग गया।

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SJK News Chief Editor (SJK News)