परमात्मा की भक्ति से मन को आत्मिक शांति मिलती है:जिनमणिप्रभसूरीश्वर

माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई पुनीत काम नहीं, साध्वीवर्या ने कहा- संस्कार ही जीवन की पूंजी

Jul 13, 2025 - 22:46
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परमात्मा की भक्ति से मन को आत्मिक शांति मिलती है:जिनमणिप्रभसूरीश्वर

बाड़मेर : खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. ने रविवार को सुधर्मा प्रवचन वाटिका संघशास्ता वर्षावास 2025 के दौरान प्रवचनमाला धर्म सभा सम्बोधन में बोले मां अपने आप में ऐसा शब्द जो सृष्टि के आरम्भ से लेकर परमात्मा के मिलन तक वो सब सिखाती जिसे और कोई गुरू नहीं सिखा सकता। मां खुद से ज्यादा अपने बच्चों की खुशी के लिए सब कुछ न्योछावर कर देती है।

अंग्रेजी में एक कहावत है 'गिव एण्ड टेक' पर मां का एक प्यार ऐसा है जिसमें वो केवल देती है, लेती नहीं-मांगती नहीं। जब तक मां की सांसें चलती हैं, तब तक उसकी एक ही प्रार्थना रहती है मेरा बेटे-बेटी खुश रहें।

 खरतरगच्छाधिपति ने कहा- अनेकों उदाहरणों से ये धरती भरी पड़ी है कि मां अपनी संतानों को पालने के लिए स्वयं कितने कष्ट उठाती हैं। पर अपनी औलाद पर दुख नहीं आए, कष्ट न आएं, इस प्रयास में वो अपना जीवन खपा देती है। भगवान की पूजा से पहले माता-पिता का पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से सांसारिक जीवन में आने वाली विपत्तियां खुद ही दूर हो जाती हैं।

उन्होंने कहा- वर्तमान जीवन में माता के लिए लोगों के पास समय ही नहीं है। जिसके कारण कई लोग माता की सेवा करने के पुनीत कार्य से भी वंचित हो रहे हैं। यही कारण है कि सुखी जीवन के लिए सारे प्रयास करने के बाद भी मानव को कहीं सुख नहीं मिल पाता। परमात्मा की भक्ति करने से मन को आत्मिक शांति मिलती है।                           

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SJK News Chief Editor (SJK News)