जो आत्मा का उत्थान कराये वह धर्म है - ज्ञान श्री माताजी
विज्ञा तीर्थ सहस्त्र कूट जिनालय पर हुआ आयोजन
निवाई - नेशनल हाईवे टोंक रोड पर गुन्सी गांव के समीप सहस्त्र कूट जिनालयों में दशहरा पर्व के पावन पर्व पर विज्ञा तीर्थ पर पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु जिसमें आश्विन शुक्ल दशमी को भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा करने का सौभाग्य नरेन्द्र कुमार सुलोचना जैन एवं अमित कुमार को मिला। विज्ञा तीर्थ क्षेत्र चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष विष्णु बोहरा ने बताया कि प्रतिदिन सुबह जिनेन्द्र देव की विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक किए जा रहे हैं।
इसके पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा मूलनायक शांतिनाथ भगवान की विशेष पूजा अर्चना कर रहे हैं। अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक विमल पाटनी जौंला ने बताया कि मनोकामना पूर्ण अतिशयकारी मूलनायक शांतिनाथ भगवान की जिन सहस्त्र नाम शांतिधारा अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न किया गया। जिसमें जयपुर टोंक निवाई कोटा अजमेर सहित कई जगहों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विज्ञा तीर्थ के संयोजक महावीर प्रसाद पराणा एवं मीडिया प्रभारी विमल पाटनी जौंला ने बताया कि क्षेत्र पर भगवान शीतलनाथ का मोक्ष कल्याण दिवस मनाया गया
जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इस दौरान अनिल सिंहल, शेलेन्द्र पाटनी, महेन्द्र चंवरिया, महावीर प्रसाद छाबड़ा राजेश बनेठा मोनू पाटनी पारसमल चेनपूरा सुन्दर पाटनी आकाश जैन विमल पाटनी राजेश झांझरी सुलोचना देवी, बबीता जैन, निशा जैन शकुंतला छाबड़ा सहित कई महिलाओं एवं पुरुषों ने विश्व शांति की कामना को लेकर यज्ञ किया गया।
इस अवसर पर आर्यिका ज्ञान श्री माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व का कोई भी धर्म हो सत्य अहिंसा और अध्यात्म की बात उसमें निश्चित मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो आत्मा का उत्थान कराये वह धर्म है और जो आत्मा का पतन कराये वह अधर्म है। सत्य अहिंसा और स्यादवाद तो सभी धर्मों का प्राण है अंतरंग की इस परणति में कोई भेद नहीं है।
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