कृष्णमय हो उठी छोटीकाशी
हर ओर कृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास छाया रहा
जयपुर। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर छोटीकाशी कृष्णमय हो उठी। हर ओर कृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास छाया रहा। वैष्णव मंदिरों की तो छटा ही निराली थी। गुब्बारों, फूलों, रंग बिरंगी रोशनी से सजे मंदिरों में दिनभर दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ता रहा। मुख्य आयोजन जयपुर के आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में हुआ। यहां करीब छह लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सुबह से मध्य रात्रि तक भक्ति का सागर छलकता रहा। दर्शनार्थियों से अटे मंदिर में में जैसे ही रात्रि के 12 बजे तो 31 तोपों की हवाई गर्जना के बीच भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ तो उच्च स्वर में शंखनाद का निनाद हो उठा।
वेदपाठी ब्राह्मणों ने सस्वर में वेदपाठ किया। हर ओर हर्ष मिश्रित ध्वनि के बीच सभी रोमाचिंत हो रहे थे। लग रहा था कि उनके सामने ही कृष्ण ने अवतार ले लिया है। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी और सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने शालिग्राम भगवान का पूजन कर ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक किया। 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा, 11 किलो शहद से अभिषेक के दृश्य को श्रद्धालु अपलक निहारते रहे। अभिषेक संपन्न होते हुए पूरा मंदिर एक बार फिर श्रद्धाभरे जयकारों से गूंजायमान हो उठा। ठाकुर जी को पंजीरी, लड्डू, खिरसा का भोग लगाया गया। जय निवास बाग स्थित मंच से नि:शुल्क चरणामृत एवं पंजीरी वितरण किया गया। इससे पूर्व सुबह भी पंचामृत अभिषेक कर ठाकुरजी को नवीन पीत वस्त्र, आभूषण एवं पुष्पों से श्रृंगार किया गया। सुबह से ही हर किसी के कदम गोविंद देवजी मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। वाहनों की रेलमपेल के कारण बार-बार जाम लगता रहा। गोविंद देवजी मंदिर के आसपास के कृष्ण मंदिरों में भी उल्लास कम नहीं था। सब मंदिरों में नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जयघोष गूंजता रहा। श्री गोविंद देवजी मंदिर में श्रद्धालुओं को 13 घंटे दर्शन का अवसर मिला। सुबह मंगला झांकी से पूर्व ही दर्शनार्थी कतारों में लग गए।
जैसे ही पट खुलने का पता चला दर्शनार्थियों ने राधे राधे से मंदिर परिसर को गूंजायमान कर दिया। मंगला झांकी सुबह 4:30 से 7 बजे खुली रही। धूप झांकी में दर्शनार्थियों की संख्या में थोड़ी कमी आई। लोगों को बिना किसी परेशानी के दर्शन हुए। सुबह की सभी झांकियों में दर्शन की सुचारू व्यवस्था रही।
कतारों में दिखा भक्तों का उत्साह:
श्रृंगार और राजभोग झांकी में दर्शनार्थियों की संख्या फिर बढ़ गई। श्रद्धालु कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इस दौरान कतारों में लगी युवाओं की टोलियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। युवा लगातार भजनों की स्वर लहरियां बिखेरते रहे। ऐसे में कब मंदिर के छांवण तक पहुंच गए पता ही नहीं चला। श्रद्धालुओं ने अपनी सुविधानुसार लाइनों में लग कर दर्शन किए। आम श्रद्धालुओं के लिए बिना जूते-चप्पल और जूते-चप्पल सहित दो अलग-अलग लाइन बनाई गई थी। पास धारकों के लिए विशेष लाइन लगाई गई थी। जलेबी चौक से आने वालों का निकास जय निवास बाग पूर्वी द्वार से तथा ब्रह्मपुरी और कंवर नगर से आने वालों का निकास चिंताहरण हनुमान मंदिर मार्ग से कराया गया।
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