कलयुग नहीं, कलहयुग चल रहा : विहसंत सागर
धैर्य और सम्मान की कमी, शुभ संकेत नहीं भिंड: भिंड शहर के बगिया क्षेत्र में चातुर्मास
भिंड: भिंड शहर के बगिया क्षेत्र में चातुर्मास वर्षायोग कर रहे जैन संत विहसंत सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में समाज की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब हम केवल "कलयुग" में नहीं, बल्कि "कलहयुग" में जी रहे हैं, जहां हर घर में मतभेद, विवाद और असहिष्णुता तेजी से बढ़ रही है।
मुनिश्री ने कहा कि आज के समय में छोटे-छोटे विषयों पर बहस और झगड़े आम हो गए हैं। माता-पिता या बड़े कुछ कहें तो जवाब देना सामान्य बात हो गई है। पति-पत्नी, बच्चे-बुजुर्ग हर संबंध में धैर्य और सम्मान की कमी साफ झलक रही है। यह सब आने वाले समय के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने समझाया कि जो परिवार आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और समर्पण से रहते हैं, वहीं सच्चे मायनों में सुखी होते हैं।
छठ्ठम काल: साढ़े अठारह साल बाद शुरू होगा भयावह युग
विहसंत सागर महाराज ने बताया कि वर्तमान कलयुग के बाद एक और काल शुरू होगा, जिसे छठ्ठम काल कहा गया है। यह युग साढ़े अठारह वर्षों के बाद प्रारंभ होगा और लगभग 21 हजार वर्षों तक चलेगा। इस विकट युग में मानव की औसत आयु घटकर 12—16 वर्ष रह जाएगी। शरीर की ऊंचाई एक हाथ जितनी रह जाएगी। धर्म, गुरु, मंदिर और जातीय व्यवस्थाएं समाप्त हो जाएंगी साथ ही समाज अज्ञान, पीड़ा और अधर्म से घिरा रहेगा।
राजनीति में धर्म के मार्ग की आवश्यकता
प्रवचन सभा में उपस्थित भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरवरिया ने मुनिराज से आशीर्वाद लिया और उन्हें श्रीफल अर्पित किया। इस अवसर पर मुनिराज ने कहा, राजनीति एक ऐसा दलदल है, जिसमें धर्मच्युत होने का खतरा होता है। लेकिन जो धर्म के मार्ग पर रहकर राजनीति करता है, वह कभी असफल नहीं होता।
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