सिद्ध भगवान की आराधना करने से होती है सुख की प्राप्ति - आचार्य वर्धमान सागर
आचार्य धर्म सागर महाराज की जन्म जयंती समारोह की आमंत्रण पत्रिका का किया विमोचन,
निवाई। राष्ट्रीय संत आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में संचालित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान में 400 पूजार्थियो ने संगीत के साथ पूजा अर्चन ने बताया कि सागर महाराज एवं मुनि हितेन्द्र सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सोधर्म इन्द्र सन्मति कुमार, कमलेश देवी जैन, सुकुमाल जैन, महिपाल जैन एवं मोहित चवरियां एवं जिनोदय युवा संघ के कार्यकर्ताओं ने भगवान के पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की। जिसमें विधानाचार्य पण्डित मुकेश शास्त्री विनम्र गुडग़ांव हरियाणा एवं विधानाचार्य पण्डित सुरेश कुमार शास्त्री द्वारा सभी इन्द्र इन्द्राणियों ने देव शास्त्र, गुरु पूजा, भगवान पाश्र्वनाथ पूजा के साथ श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान की संगीतमय पूजा अर्चना की गई। जिसमें केशव एण्ड पार्टी भोपाल के भजनों द्वारा श्रद्धालुओं ने 512 श्रीफल अघ्र्य चढाकर आराधना की।
विधान में आचार्य वर्धमान सागर महाराज सहित मुनि चिन्तन सागर महाराज, मुनि मुमुक्षु सागर महाराज व मुनि हितेंद्र सागर महाराज ने अपने मुखारविंद से जाप अनुष्ठान करवाया। इस अवसर पर सुकुमाल जैन चंवरिया, महावीर प्रसाद पराणा, शंभु कठमाणा, अरूण लटूरिया, प्रकाश छाबडा, नितिन चंवरिया, यामिनि छाबडा सहित कई गणमान्य लोगों ने समारोह की आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया। इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि संसारी प्राणी हमेशा भगवान की पूजा अर्चना करते हैं। संसार में कहीं भी सुख दिखाई नहीं देता है। यह संसार तो दुखमय है। सिद्ध भगवान की आराधना करने से सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि संगीत हमे उत्साहित करता है। आत्मा से जो सुख मिलता है वहीं सच्चा सुख है। गुरु हमें मोक्ष का मार्ग बताते हैं। कर्म आत्मा के साथ प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि भटकने वाला व्यक्ति कभी सुख प्राप्त नहीं कर सकता। सुख दुख तो व्याधिन है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक रहकर सुखमय जीवन व्यतीत कर अपने जीवन को सुखमय बनाने की सोच बनायें।
What's Your Reaction?

