भारत को सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनना है : भागवत
बोले-दुनिया ताकत की भाषा समझती है; विश्व गुरु भारत कभी भी युद्ध का कारण नहीं बनेगा
कोच्चि. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें फिर से सोने की चिड़िया नहीं बनना है, बल्कि हमको शेर बनना है। दुनिया शक्ति की ही बात समझती है और शक्ति संपन्न भारत होना चाहिए।
शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को सही दिशा में ले जाना है, ताकि वह भूखा न रहे और आत्मनिर्भर बन सके। शिक्षा केवल आजीविका तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यक्ति को नैतिक और सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाए।
पश्चिमी दृष्टिकोण से लिखा इतिहास पढ़ाया जा रहा
भागवत बोले-आज जो इतिहास पढ़ाया जाता है, वह पश्चिमी दृष्टिकोण से लिखा गया है। उनके विचारों में भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। विश्व मानचित्र पर भारत दिखता है, लेकिन उनकी सोच में नहीं। उनकी किताबों में चीन और जापान मिलेंगे, भारत नहीं। आरएसएस चीफ ने कहा, 'पहले विश्व युद्ध के बाद शांति की बातें की गर्इं, किताबें लिखी गर्इं और राष्ट्र संघ बना, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध हुआ। फिर संयुक्त राष्ट्र बना, लेकिन आज भी लोग चिंतित हैं कि कहीं तीसरा विश्व युद्ध न हो जाए।
What's Your Reaction?

