भक्तों को सत्संग में लगाकर बुराइयों से बचाते हैं साधु-संत : गुप्ति सागर महाराज

48वें वर्षा योग में कई राज्यों से शामिल हुए श्रद्धालु

Jul 15, 2025 - 21:50
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भक्तों को सत्संग में लगाकर बुराइयों से बचाते हैं साधु-संत : गुप्ति सागर महाराज

सोनीपत: चातुर्मास का अर्थ है ठहराव, यही वह समय है जब सारी धरती जीवों की उत्पत्ति का स्थान बन जाती हैं। इसलिए श्रवण संस्कृति के अनुसार ऋषि मुनि, सन्यासी एक स्थान पर रुककर आत्म साधना करते हुए अपने भक्तों को सत्संग में लगाकर बुराइयों से बचाते हैं।

उक्त विचार महायोगी उपाध्याय गुप्ति सागर महाराज ने रविवार को पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर-15 में 48वें पावन वर्षा योग स्थापना के भव्य कार्यक्रम में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि दौरान साधु संत-अपने भक्तों के साथ मिलकर देश व समाज की समस्याओं का समाधान खोजते हैं। मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को संदेश किया कि ‘चला फिरो थको मत, खाओ पिओ छको मत। मधुर बोलो बको मत, देखो भालो तको मत। सच्चाई की राह पर, डटे रहो हटो मत। खाना खाओ प्रेम से, जल्दी-जल्दी भको मत। वीर बनो डरो मर, बुरे काम करो मत’। इससे पूर्व सेक्टर-14 से मुनि महाराज को शोभायात्रा के साथ दिगंबर जैन मंदिर तक ले जाया गया। शोभायात्रा में चातुर्मास स्थापना कलश उठाए श्रद्धालु नाचते गाते चल रहे थे।

जगह-जगह श्रद्धालुओं ने गुप्ति सागर महाराज की मंगल आरती की व दीदी रंजना शास्त्री ने मंगल पाठ किया। कार्यक्रम में मेयर राजीव जैन ने कहा कि भक्तगण पिछले 30 वर्षों से मुनि महाराज से सोनीपत में चातुर्मास के लिए आग्रह करते चले आ रहे थे। आज मुनि महाराज का चातुर्मास शुरू होने के साथ ही भक्तों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई।

उन्होंने कहा कि सोनीपत में महाराज का चातुर्मास होना गौरव का विषय और इससे भक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। डीसी सुनील सारवान ने कहा कि गुप्ति सागर महाराज के मुखारविंद से निकला एक-एक शब्द अमृतमयी बूंद के समान है और जीने की राह सिखाता है।

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SJK News Chief Editor (SJK News)