चातुर्मास साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर तप-साधना करेंगे: लक्ष्मी भूषण माताजी
सिंघाना में जैन समाज का पहला चातुर्मास
मनावर: मध्य प्रदेश के मनावर के पास स्थित सिंघाना गांव में दिगंबर जैन समाज का पहला चातुर्मास प्रारंभ हुआ। आचार्य त्रिलोक तीर्थ प्रणेता विद्याभूषण सन्मति सागर महाराज की शिष्या लक्ष्मी भूषण माताजी का 33वां चातुर्मास कलश स्थापना समारोह आयोजित किया गया।
लक्ष्मी भूषण माताजी ने कहा कि सिंघाना में अगले चार महीने धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इस दौरान जैन साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना और अहिंसा का पालन करते हैं।
मंदिरों और उपाश्रयों में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम होंगे। चातुर्मास जैनियों के लिए आध्यात्मिक विकास का समय होता है, जहां वे अपने कर्मों को शुद्ध करने और आत्म-ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
समारोह में सिंघाना और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने माताजी की आरती की और पाद प्रक्षालन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य सुरेश गंगवाल ने इसे सिंघाना के लिए गौरव का क्षण बताया।
ललितपुर से आए माताजी के परिजनों और बीकानेर महिला मंडल ने शास्त्र भेंट किया। आष्टा से आए सचिन जैन ने अपनी स्वर लहरियों से श्रीजी की संगीतमय महाआरती प्रस्तु
त की।
What's Your Reaction?

