दया ही धर्म का मूल : उमाकान्त महाराज

मांस के भक्षण की वजह से दया जाती जा रही है। जब दया ही चली जाएगी, जो धर्म का मूल है तो धर्म कहां से रहेगा? और अगर धर्म नहीं रहेगा तो कर्म खराब हो जाएंगे और कर्मों की सजा मिल जाएगी। फिर आप चाहे कितना भी उपाय करोगे, तीर्थों में जाओगे, व्रत रखोगे लेकिन खराब कर्मों की वजह से आपको उसका फल नहीं मिलेगा

Apr 6, 2026 - 21:21
 0  16
दया ही धर्म का मूल : उमाकान्त महाराज

जयपुर। बाबा जयगुरुदेव महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम सन्त  बाबा उमाकान्त महाराज का जयपुर में सत्संग कार्यक्रम बाबा उमाकान्त महाराज के आश्रम, ठिकरिया में आयोजित किया गया। इसमें हजारों की संख्या में गुलाबी रंग के वस्त्र पहने भक्तों को बाबा उमाकान्त महाराज ने सत्संग सुनाते हुए कहा कि लोग दया से अलग हो रहे हैं और उसका कारण यह है कि माहौल खराब हो गया है। जब लोग मांसाहार करने लग जाते हैं, मांस से बनी हुई चीजें खाने लग जाते हैं, मांसाहारी के हाथ का बनाया हुआ भोजन खाने लग जाते हैं तब उनके अंदर से दया खत्म होने लग जाती है। तो अन्न के दूषित होने की वजह से, मांस के भक्षण की वजह से दया जाती जा रही है।

 जब दया ही चली जाएगी, जो धर्म का मूल है तो धर्म कहां से रहेगा? और अगर धर्म नहीं रहेगा तो कर्म खराब हो जाएंगे और कर्मों की सजा मिल जाएगी। फिर आप चाहे कितना भी उपाय करोगे, तीर्थों में जाओगे, व्रत रखोगे लेकिन खराब कर्मों की वजह से आपको उसका फल नहीं मिलेगा। इसीलिए जीवों पर दया करो। प्रकृति इसीलिए नाराज़ है क्योंकि लोग गोला-बंदूक दाग करके हवा को खराब कर रहे हैं और पवन देवता को नाराज़ कर रहे हैं। धरती को खोद करके सात सौ फुट असलाह रखे हुए हैं इसीलिए धरती भी नाराज़ है। धरती को उतना ही खोदो जितना अनाज पैदा करना है हालांकि उसके बाद भी प्रायश्चित करना पड़ता है तब उसकी माफी होती है। अग्नि देवता भी नाराज़ है कि हम तो लोगों को गर्मी देने के लिए उनका पेट भरने के लिए काम कर रहे हैं ताकि आग के ऊपर रोटी बनाकर उसको खाकर ये अपना पेट भर ले, लेकिन अब लोग प्रकृति की चीजों को झुलसा रहे हैं। उसमें पेड़-पौधे और जानवर भी जल रहे हैं।

तो ये सब देवता नाराज़ हैं और ये तरह-तरह की आपदा लाएंगे। हर तरफ से आदमी निराश होता है तब भगवान को याद करता है। गुरु महाराज कहा करते थे कि एक मिनट में अगर भगवान ना याद आ जाए तब कहना। फिलहाल जो पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात हैं। बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं। हमारे गुरु महाराज भी कहा करते थे और मैं भी बराबर बोलता रहा हूँ कि ये युद्ध का जो हथियार है, इसको लोग बनाना बंद कर दें। विश्व के जितने भी बड़े देश हैं, वो सब बैठ कर के एक मीटिंग गोष्ठी करें कि जिससे पूरे विश्व में शांति का माहौल बन जाए। ये जो हथियार बना रहे हैं, वे हथियार बनाना लोग बंद करके छोटे-छोटे देशों को गोद ले लें और उनका विकास कर दें, उससे उनका नाम ज्यादा हो जाएगा।

जय गुरु देव' नाम है बचत का उपाय–
इस समय पर आफत आने वाली है लेकिन जो लोग कहना मान रहे हैं और इस परिवर्तन की बेला में साथ दे रहे हैं, ऐसे कुछ लोग जो गुरु भक्त हैं, उनके द्वारा आफत टल रही है।  आप लोग भी अगर गुरु भक्त बन जाओ और दया धर्म आपके अंदर आ जाए तो आप भी बहुत से लोगों को बचा सकते हो। कैसे बचा सकते हो? हर युग में उस वक्त के महापुरुष द्वारा एक जगाया हुआ नाम रहा है और उस नाम को लेने से लोगों को फायदा हुआ है। इसी तरह से गुरु महाराज द्वारा जगाया हुआ नाम 'जय गुरु देव' इस समय का जागृत नाम है और अगर इसको आप घर-घर तक पहुंचा दो, इस नाम को बराबर याद करते रहो और मुसीबत के समय इस नाम को बोलना तो आपकी रक्षा हो जाएगी। मुसीबत कम हो जाएगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

SJK News Chief Editor (SJK News)