जयपुर। “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ दो दिवसीय कॉंफ्रेन्स का शुभारंभ गुरूवार को उदयपुर स्थित होटल अरावली में हुआ। बैठक में सहकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सहकारिता विभाग के सचिव व रजिस्ट्रार भाग ले रहे हैं। सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस कॉंन्फ्रेंस का शुभारम्भ किया। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री पंकज कुमार बंसल भी इस अवसर पर मंचासीन रहे।
कॉंन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकार के बिना समृद्धि संभव नहीं है। सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नियमों का सरलीकरण, बैंकिंग व्यवस्था में सुधार तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच प्रभावी तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गुजरात के बनासकांठा जिले के सफल सहकारिता मॉडल का उल्लेख करते हुए बताया कि रेगिस्तानी क्षेत्र होने के बावजूद वहाँ वृक्षारोपण और डेयरी सेक्टर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने अधिकारियों से जिलों और गांवों का दौरा कर आमजन से प्रत्यक्ष फीडबैक लेने की आवश्यकता जाहिर की।
डॉ. भूटानी ने सहकारी बैंकिंग का उल्लेख करते हुए दोहरे नियंत्रण से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों के बोर्ड के सुचारु संचालन और शाखा विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आरबीआई द्वारा बिना पूर्व अनुमति 10 शाखाएं खोलने की छूट दी गई है, बैंकों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहकारिता से जुड़ी विभिन्न संस्थाएं अलग-अलग मंत्रालयों के अधीन हैं। इन संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय तालमेल और समन्वय आवश्यक है। डॉ. भूटानी ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति के तहत राज्यों से अपेक्षा की गई है कि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नीति को कस्टमाइज कर राष्ट्रीय नीति के साथ एकीकृत करें। उन्होंने पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन समितियों में सदस्यता विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।