नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मणिपुर के मोइरांग में आईएनए संग्रहालय और सैनिक स्कूल इम्फाल का दौरा किया। उन्होंने आईएनए की वीरता और बलिदान को नमन किया तथा उस ऐतिहासिक स्थल का दौरा किया, जहां भारतीय तिरंगा फहराया गया था। उन्होंने आईएनए युद्ध संग्रहालय गैलरी का भी अवलोकन किया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पुष्पांजलि अर्पित की।
इसके बाद उपराष्ट्रपति ने सैनिक स्कूल इम्फाल का दौरा किया। उन्होंने स्कूल के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और कैडेटों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आईएनए की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया और कहा कि देशभर के कई स्वतंत्रता सेनानी, जिनमें तमिलनाडु के लोग भी शामिल थे, आईएनए में शामिल हुए और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
कैडेटों को संबोधित करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने अनुशासन, साहस और नेतृत्व को जीवन में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन उत्कृष्टता की नींव है। उन्होंने कैडेटों से दूसरों के लिए खड़े होने, जिम्मेदारी स्वीकार करने, उदाहरण पेश करने और सही निर्णय लेने का नैतिक साहस रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय एकता का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की भाषाओं, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता एक साझा राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने में सैनिक स्कूलों की विशेष भूमिका है, क्योंकि यहां विविध पृष्ठभूमि के छात्र एक साथ सीखते, प्रशिक्षण लेते, खाते और खेलते हैं।
तकनीकी बदलाव की तेज गति का जिक्र करते हुए उन्होंने कैडेटों से देशभक्ति और अखंडता जैसे मूल्यों को बनाए रखते हुए अनुकूलनशील, नवाचारी और तकनीकी रूप से जागरूक बनने का आग्रह किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों को युवाओं के लिए नए अवसरों वाला क्षेत्र बताया।
कैडेटों के साथ बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति ने पूर्वोत्तर को भारत का अभिन्न और सुंदर हिस्सा बताया तथा क्षेत्र के लोगों की मेहनत और योगदान की सराहना की। उन्होंने छात्रों से बदलते समय के साथ खुद को ढालने और अपनी अच्छाई बनाए रखने का आह्वान किया।
सेलुलर जेल की अपनी यात्रा से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने छात्रों को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को समझने के लिए ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राएं देशभक्ति की भावना को प्रेरित करती हैं और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए बलिदानों की याद दिलाती हैं।
विकसित भारत के निर्माण में छात्रों की भूमिका पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर छात्र अपनी क्षमता के अनुसार प्रतिदिन अपना कर्तव्य निभाकर इसमें योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना सामूहिक रूप से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देगा।
इस अवसर पर मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह, रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला, सैनिक स्कूल सोसाइटी के निरीक्षण अधिकारी मेजर जनरल शुभंकर बसु, ब्रिगेडियर अमित चटर्जी और सैनिक स्कूल इम्फाल के प्रधानाचार्य कर्नल ए. राजीव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।