रास्ता खोलो अभियान...गढ़ रहा सुशासन की नई पहचान
अभियान के तहत 17 महीनों से भी कम समय में खोले गए 1800 से ज्यादा रास्ते
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रेरणा से चलाए जा रहे रास्ता खोलो अभियान के तहत 30 वर्षों से बंद पड़ा यह मार्ग जब खुला, तो मानो ग्रामीणों की जिंदगी ही बदल गई। अब गडूड़ा से चकवाड़ा की दूरी 17 किलोमीटर से सिमटकर महज 7 किलोमीटर रह गई है। यह केवल दूरी कम होने की बात नहीं, बल्कि रोज की मशक्कत, अतिरिक्त खर्च और समय की बर्बादी से मुक्ति की कहानी है। ग्रेवल सड़क बनने से यह राहत और भी सहज हो गई है, अब किसान अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, बच्चे बिना थके स्कूल जा रहे हैं और जरूरत के समय चिकित्सा सुविधाएं भी तेजी से उपलब्ध हो पा रही हैं।
लसाड़िया की यह सफलता की कहानी भले ही एक उदाहरण हो, लेकिन इसके पीछे छिपा बदलाव बहुत व्यापक है। जयपुर जिले में महज 17 महीनों से भी कम समय में लसाड़िया की तर्ज पर 1800 से अधिक वर्षों से अवरुद्ध रास्तों को खुलवाकर लाखों ग्रामीणों के जीवन को सरल और सुगम बनाया गया है।
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के कुशल निर्देशन और सतत मॉनिटरिंग में यह अभियान केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। संवाद, सहमति और समझाइश के माध्यम से वर्षों पुराने विवादों को सुलझाते हुए गांवों, ढाणियों और खेतों तक जाने वाले रास्तों को फिर से जीवंत किया गया है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री आशीष कुमार ने बताया कि 15 नवम्बर 2024 से 29 मार्च 2026 तक की अवधि में इस अभियान के तहत कुल 1 हजार 802 रास्ते खुलवाए जा चुके हैं। प्रत्येक तहसील में हर सप्ताह न्यूनतम 3 रास्ते खुलवाने का लक्ष्य निर्धारित कर प्रशासन ने कार्य को निरंतरता प्रदान की है। अभियान के अंतर्गत फागी तहसील ने सर्वाधिक 154 रास्ते खुलवाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मौजमाबाद तहसील में 135 रास्ते खोलकर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई।
साथ ही उन्होंने बताया कि चौमूं में 109, शाहपुरा में 106, चाकसू में 100, फुलेरा में 99, जमवारामगढ़ में 96, आमेर में 94, दूदू में 92, रामपुरा डाबड़ी में 91, माधोराजपुरा में 86, बस्सी में 85, जोबनेर में 84, जालसू में 79, कोटखावदा में 78, किशनगढ़ में 77, तुंगा में 61, सांगानेर में 39, कालवाड़ में 10 तथा जयपुर तहसील में 5 रास्ते खोले गए हैं।
इस अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है, जिससे किसानों को खेतों तक कृषि मशीनरी ले जाने और उपज को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिली है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हुई है, वहीं विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज जाने में अब लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
रास्ता खोलो अभियान ने न केवल भौतिक रूप से मार्गों को खोला है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक परिवर्तन लाते हुए वर्षों पुराने विवादों को समाप्त कर सामाजिक सौहार्द को सुदृढ़ किया है। सहमति आधारित इस पहल ने प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रेरणा और जिला प्रशासन के समर्पित प्रयासों से यह अभियान आज ग्रामीण क्षेत्रों में राहत, विश्वास और सुशासन का पर्याय बन चुका है, जो विकास के साथ-साथ जनविश्वास के नए मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।
यह पहल सिर्फ बंद रास्तों को खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के दिलों में विश्वास, रिश्तों में सामंजस्य और जीवन में सहजता का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है। रास्ता खोलो अभियान ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो और प्रयास निरंतर हों, तो प्रशासन केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि बदलाव की एक सशक्त धारा बन सकता है।
What's Your Reaction?

