धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए: आचार्यश्री वर्धमान सागर जी

भगवान की भक्ति निर्मल परिणाम की विशुद्धता समर्पण पूर्वक करने से पुण्य की प्राप्ति और पुण्य से मोक्ष फल की प्राप्ति होती है

Oct 13, 2025 - 14:45
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धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए: आचार्यश्री वर्धमान सागर जी
धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए: आचार्यश्री वर्धमान सागर जी
धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए: आचार्यश्री वर्धमान सागर जी
धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए: आचार्यश्री वर्धमान सागर जी

टोंक: धर्म रथ का पवर्तन श्री आदिनाथ भगवान से श्री महावीर स्वामी तक और उनके बाद गणधर ,केवली, श्रुतकेवली आचार्य ने किया है। धर्म रथ के साधु और श्रावक दो पहिए हैं। सामूहिक भक्ति से फल मिलता है धर्म के क्षेत्र में जो जागृत सचेत रहता है उसे धर्म रूपी पुण्य मिलता है संघ की सेवा तत्परता से करना चाहिए चातुर्मास का अवसर भक्ति से मिलता है भक्त भगवान से भक्ति से जुड़ते हैं , इसी भक्ति से धर्म रथ चलता है ।प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी से श्रमण परंपरा का धर्म रथ निरंतर चल रहा है।

 आचार्य परमेष्ठी प्राणी मात्र को उपदेश से जागृत सावधान करते हैं यह मंगल देशना निवाई समाज के 300 से अधिक भक्तों की महिती उपस्थिति में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अतिशय क्षेत्र टोंक नगर की धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार आचार्य श्री ने धर्म सभा में आगे बताया कि भक्त भगवान के सामने शक्ति से भक्ति करता है। भक्ति निर्मल भाव ,परिणाम ,मन वचन, काय से समर्पित करता है।

 भगवान की भक्ति में यह भावना करते हैं कि मुझे भी आप जैसा बनना है मुझे भी मार्ग बताइए। भगवान की निर्मल भक्ति भाव और द्रव्य , परिणामों की विशुद्धि समर्पण से पुण्य ओर पुण्य से मोक्ष फल मिलता हैं । माता भोली भाली सरल होती हैं जिनवाणी भी हमारी माता है हमें जिनवाणी माता की बात मानना चाहिए उसी से जीवन बनता हैं। आचार्य श्री प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने अपने उपदेश में बताया कि पंच परमेष्ठी की भक्ति की जाती है। उसके लिए शरीर और आत्मा का भेद समझना जरूरी है आत्मा पर श्रद्धान जरूरी है।

पवन कंटान कमल सर्राफ विमल जोला अनुसार धर्म सभा के पूर्व निवाई नगर से 300 से अधिक भक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से संघ सहित शीतकालीन प्रवास तथा वर्ष 2026 का चातुर्मास करने हेतु श्रीफल भेंटकर निवेदन किया। पवन बोहरा ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के निवाई आगमन ओर चातुर्मास प्रयासों से अवगत करा कर बताया कि संघस्थ आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी निवाई नगर गौरव हैं।

श्री आदिनाथ भगवान , प्रथमाचार्य श्री शांति सागर महाराज, श्री वीर सागर जी, श्री शिव सागर जी श्री धर्म सागर जी, श्री अजीत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य निवाई नगर की समाज को प्राप्त हुआ। सभी पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पित कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन 76 से अधिक अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, फलों से पूजन भक्ति भाव नृत्य पूर्वक की गई। टोंक नगर समाज ओर चातुर्मास कमेटी के पदाधिकारियों ने निवाई समाज का स्वागत कर बहुमान किया

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SJK News Chief Editor (SJK News)