जिनेंद्र भक्ति का बुलडोजर चलाकर अशुभ कर्मों को शक्ति हीन कर लो: आर्यिका सुभूषणमति माताजी
पूजन के प्रकार और उनका फल
उदयपुर: उदयपुर* में 41 वें वर्षायोग हेतु ससंघ विराजमान गुरु परंपरा गौरव , चर्या र्शिरोमणि गणिनी , आर्यिका का रत्न श्री सु भूषणमति माताजी ने धर्म सभा को उद्बोधित करते हुए कहा जैसे पूर्णिमा का चंद्रमा देखने से मन को बड़ा आनंद आता है वैसे ही जो संसार से भयभीत है ऐसे संसार भिरु जीव को परमात्मा की पूजन करने से आनंद आता है और यह अपने मन को स्थिर करने के लिए अच्छे अच्छे द्रव्यों का अवलंबन लेता है।
*बस मैं और मेरा परमात्मा* इस प्रकार की पूजन भव्यों के जीवन में अतिशय पुण्य की वृष्टि कर देती है। आचार्यों ने पूजन के *तामसी , राजसी और सात्विक* ऐसे तीन भेद भी बताएं हैं ।
तामसी पूजन स्वयं ना करके नौकरों से करवाना, इससे मात्र 10 उपवास का फल मिलता है। राजसी पूजन शान शौकत के साथ सम्मानित व्यक्तियों को साथ लेकर पूजन करना उससे सो (100) उपवास का फल मिलता है । परंतु सात्विक पूजन भक्ति से ओत प्रोत स्वयं की सामग्री से शुभ चिंतन के साथ पूजन करना स्वर्ग एवं परंपरा से मोक्ष का कारण है । असातावेदनीय व लाभांतराय कर्म के उदय में अथवा नवग्रह कृत बाधा होने पर चारों दिशाओं में घूमने के बजाय जिनेंद्र भक्ति का अवलंबन लेकर पाप को छेद करके पुण्य का बैलेंस बढ़ा लेना चाहिए।
जिनेंद्र भगवान की पूजन तत्कालीन बंध की अपेक्षा असंख्यात गुना कर्म निर्जरा का कारण है । जिनेंद्र भगवान के दर्शन से निद्यत - निकाचित ( जटिल से जटिल ) कर्म भी चूर-चूर हो जाते हैं । इसलिए जिनेंद्र भक्ति का बुलडोजर चलाकर अशुभ कर्मों को शक्ति हीन कर लो ।
टैक्स चुराने का हुनर आ सकता है तो 24 घंटे में से परमात्मा की पूजन के लिए एक घंटा निकालने का हुनर भी आना चाहिए। गुरु मांँ के श्रीमुख से स्वर्ग मोक्ष की चाबी ( देव पुजन) जानकर सभी भक्त पूजा का भाव बनाते हुए गुरु माँ का जय घोष करते हुए वन्दामी वन्दामी वन्दामी करते निज धाम को प्रशस्त हुए ।
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