धर्म का मार्ग गुरु ही प्रशस्त करते हैं जीवन में: उपाध्याय ऊर्जयंत सागर जी
श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में विराजमान परम पूज्य आचार्य गुरुवर वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर जी महाराज के अंतिम दीक्षित शिष्य परम पूज्य उपाध्यक्ष श्री ऊर्जयंत सागर जी महाराज ने आयोजित धर्म सभा में मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा
जयपुर : श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में विराजमान परम पूज्य आचार्य गुरुवर वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर जी महाराज के अंतिम दीक्षित शिष्य परम पूज्य उपाध्यक्ष श्री ऊर्जयंत सागर जी महाराज ने आयोजित धर्म सभा में मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि भक्तो के जीवन का कल्याण बिना गुरु के असंभव क्योंकि गुरु ही जीवन का वह दर्शन है
जिसके बिना भक्ति का मार्ग प्रशस्त नही हो सकता यदि किसी के पास गुरु का आशीर्वाद गुरु का दुलार नही है तो वह अंधकारमय जीवन जी रहा है यदि जीवन में प्रकाश चाहते हो तो गुरु रूपी गहने को आवश्यक रूप से अंगीकार करने का श्रम करो गुरु ही जीवन की कठिनाइयों से दूर ले जाने का रास्ता बताता है गुरु ही जीवन को धर्म की राह पर चलने का मार्ग बताता है इसलिए बंधुओं मनुष्य के जीवन में गुरु की आवश्यकता उतनी ही है जितनी भोजन की होती है
प्रचार समन्वयक विनेश सोगानी ने बताया कि इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने सभी भक्तो को मंगल आशीर्वाद देते हुए णमोकार महामंत्र की प्रशस्ती प्रदान की कार्यक्रम में एमपी जैन, ज्ञान बिलाला ,कैलाश सेठी ,सुरेश जैन बांदीकुई, विनेश सोगानी, पदमचंद जैन भरतपुर, निर्मल शाह, सतीश कासलीवाल , प्रमोद बाकलीवाल, प्रीति सोगानी, प्रिया बाकलीवाल ने अपनी उपस्थिति प्रदान की
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