दर्शन से होता है आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त: मुनि प्रज्ञान सागर

मुनि प्रज्ञान सागर जी एवं प्रसिद्ध सागर जी के सानिध्य में हुआ मंदिर शिलान्यास

Apr 13, 2026 - 21:25
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दर्शन से होता है आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त: मुनि प्रज्ञान सागर

बूंदी।  पार्श्वनाथ कॉलोनी देवपुरा  में  रविवार को  नवीन जिनालय श्री 1008 पार्श्वनाथ जिनालय का श्री दिगम्बर जैन खण्डेलवाल (सरावगी) समाज द्वारा  शिलान्यास एवं भूमि पूजन समारोह मुनि श्री 108 प्रज्ञान सागर जी एवं मुनि श्री 108 प्रसिद्ध सागर जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।
समाज के प्रवक्ता डॉ. तरुण जैन एवं मंत्री महावीर सेठी ने बताया कि कार्यक्रम के पूर्व पार्श्वनाथ विधान मंडल की पूजा की गई। जिसमें सोधर्म इंद्र का सौभाग्य अभिषेक दीपांक्षी बाकलीवाल केकड़ी वालो को प्राप्त हुआ।  कार्यक्रम का शुभारंभ सम्भवनाथ पाठशाला की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद इलायची देवी रावका, चंद्रेश रावका, रश्मि रावका द्वारा कार्यक्रम का झंडा रोहण किया गया।

अध्यक्ष ऋषभ सोगाणी ने बताया कि इसके मानस्तंभ एवं जिनालय के लिए मुख्य शिला, सिद्ध शिला, अरिहंत शिला, मूलनायक प्रतिमा, मानस्तम्भ प्रतिमा आदि की बोली लगाई गई। मूलनायक प्रतिमा के पूर्णयर्जक अमित जैन बरखा जैन, पर्व जैन विलासपुरिया वाले, बीएम जैन एंड कंपनी टोंक वाले रहे। मानस्तम्भ मुख्य शिला के पूर्णयर्जक कमला बाई, पदम, अशोक रोबिन कासलीवाल थे एवं मुख्य बेदी की मुख्य शिला के पूर्णयर्जक मंजू देवी, धीरज, राकेश शाह थे। नवीन जिनालय के फाउंडर मेम्बर्स विपिन गोधा, राजेन्द्र छाबड़ा, ओम प्रकाश बड़जात्या, महावीर सेठी, ऋषभ सोगाणी, मुकेश सोगनी, लोकेश गोधा, विमल कटारिया, अशोक कासलीवाल, डॉ. तरुण जैन, शांति लाल गंगवाल, लोकेश चंदवाड़ आदि ने मुनि श्री को श्री फल भेंट किया। इसके बाद मुनि श्री 108 प्रज्ञान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए दान के महत्त्व बताए।

 उन्होंने कहा कि नए जैन मंदिर की स्थापना से आत्मिक शांति, धर्म की प्रभावना और भावी पीढ़ियों के लिए संस्कार केंद्र का निर्माण होता है। यह महान पुण्य का कार्य है जो समाज को अहिंसा, त्याग और संयम की राह दिखाता है। जिनालय में भगवान की प्रतिमा के दर्शन से आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। नया जिन मंदिर बनाना जीवन का सर्वोत्तम कार्य है। यह केवल पत्थरों का ढांचा नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा को जोड़ने का माध्यम होता है। अंत मे पंडित नरेंद्रजी द्वारा मंत्रोचार के साथ विधि विधान शिलाएं रखी गई। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी पूर्णन्यास जैन ने किया।

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SJK News Chief Editor (SJK News)