टोंक नगर में बह रही धर्म रूपी ज्ञान की गंगा
बचपन के धार्मिक संस्कार और माता पिता के अनुशासन , आज्ञा से जीवन का निर्माण होता हैं धर्मसागर पाठशाला के लगभग 250 बच्चो ने किया आचार्य श्री की पूजन
टोंक : पाठशाला से जीवन का निर्माण होता है, क्योंकि पाठशाला में धर्म का उपदेश शिक्षा मिलती है ।धर्मसभा भी पाठशाला है यहां पर आचार्य, साधु परमेष्ठी द्वारा परमात्मा बनने के मार्ग पर धर्म धारण करने की प्रेरणा दी जाती है ,सभी साधु भी अपनी शक्ति अनुसार परमात्मा के गुण प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर रहे हैं ।बालकों को संस्कार बचपन से दिए जाते हैं संस्कारों से जीवन का निर्माण होता है सभी बच्चों को उन बातों से बचना चाहिए जिन्हें जीवन में विकृति खराबी आती है ।
मोबाइल से भी दूर रहना चाहिए ।सभी बालकों को माता-पिता की सहमति स्वीकृति से ही आवश्यकता होने पर घर बसाकर विवाह करना चाहिए माता-पिता का विश्वास कभी खंडित नहीं करना चाहिए सुखी रहने के लिए माता-पिता की आज्ञा और अनुशासन में रहना चाहिए। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने टोक नगर में आचार्य धर्म सागर रात्रि पाठशाला के शिक्षकों बच्चों द्वारा की गई पूजन भक्ति के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की की सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के वर्षायोग के समय प्रारंभ की गई रात्रि पाठशाला निरंतर चल रही है।
प्रसिद्ध भजन इतनी शक्ति हमें देना दाता ,मन का विश्वास कमजोर हो ना, हम चले नेक राह भूल कर भी भूल हो ,ना आचार्य श्री ने कहा कि इन पंक्तियों में सरासर गर्वित है शास्त्रों में उल्लेखित है कि वितरागी भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा भक्ति होना चाहिए भक्ति में भगवान का गुणानुवाद किया जाता हैं भगवान वितरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी है।भक्त को दर्शन कर यह भावना करना चाहिए कि मैं भी एक दिन आप जैसा बनु। जिस प्रकार वर्षा में मयूर खुशी व्यक्त कर नृत्य करता है, उसी प्रकार आप भक्तों को भी भगवान को देखकर अंतरंग परिणाम की निर्मलता के साथ भक्ति नृत्य करना चाहिए। भगवान के गुणों की भक्ति करने से हमें शक्ति प्राप्त होती है। आत्मा में ध्यान रूपी धर्म की डुबकी लगाने से हमें भगवान मिलते हैं।
कर्म नष्ट होते हैं तथा भव्यता मिलती है। आपको अच्छे धार्मिक कार्य करना चाहिए। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री धर्म सागर रात्रि पाठशाला के शिक्षकों बालकों तथा बाहर से पधारे अतिथियों द्वारा भगवान आदिनाथ आचार्य शांति सागर जी एवं अन्य पूर्वाचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की गई। दोपहर को आचार्य श्री संघ सानिध्य में एडवोकेट एवं चार्टड एकाउंटेंट का सम्मेलन हुआ जिसमें धार्मिक क्षेत्रों मंदिरों की रक्षा संरक्षण के बारे में अपने ज्ञान अनुभव साझा करने की प्रेरणा दी ।रविवार को आचार्य श्री जी का नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य त्रिलोक चंद, ज्ञानचंद, राजेश कुमार, अशोक कुमार, पुनीत कुमार बोरदा वाले परिवार को प्राप्त हुआ ।
अनेक भक्त गण आचार्य श्री ससंघ दर्शनार्थ पधार रहे हैं आज जयपुर, सीकर, कोटा, इंदौर, कलकता, निवाई आदि के गुरु भक्तों ने आचार्य श्री ससंघ के दर्शन कर पुण्यार्जन किया ।
इस मौके पर टोंक जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन बीना जैन छामुनिया, विनायक जैन, श्यामलाल फुलेता, टीकम चंद फूलेता,विमल बरवास, वीरेंद्र संघी ताराचंद बड़जात्या , सुनील आंडरा, पदम चंद आंडरा आदि समाज के लोग मोजूद थे ।
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