इंसान को इंसान ही रहने देना चाहिए: देवकीनंदन ठाकुर

कई दरवाजों पर जाना अपने इष्ट का अपमान

Dec 17, 2025 - 11:53
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इंसान को इंसान ही रहने देना चाहिए: देवकीनंदन  ठाकुर

जयपुर. कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कलियुग में भगवानों की भीड़ हो गई। कोई व्यक्ति थोड़ा सा फेमस हो जाता है तो लोग उसे ही भगवान समझ बैठते है। अगर इंसान को भगवान बना दिया जाएगा तो वह धरती पर टिक नहीं पाएगा और न आकाश में उड़ पाएगा। ये बात उन्होंने जयपुर में मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धा, विश्वास और निष्ठा के विषय पर विस्तार से बात रखी।

उन्होंने कहा- एक ही दरवाजे पर अगर टिके रहते तो तुम्हें रोना या पछताना नहीं पड़ता। व्यक्ति इसमें अपनी शान समझता है, कि हमने कोई दरवाजा नहीं छोड़ा है। यह शान नहीं अपने इष्ट का अपमान है।हमने कोई दरवाजा नहीं छोड़ा, यह कोई बड़ी बात नहीं है यह बहुत छोटी बात हो गई। आपने तमाम दरवाजे इसलिए चुने क्योंकि आपको गोविंद देव जी के दरवाजे पर विश्वास नहीं था। अपने इष्ट पर विश्वास नहीं था, इसलिए तमाम दरवाजों पर जाकर माथा पटका।
 

कथा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने पंडाल में मौजूद लोगों से पूछा कि एक बात बताइए कि अगर कोई स्त्री अपने पति को छोड़कर कई दरवाजों पर अपना माथा टकराए तो आपको अच्छा लगेगा या बुरा लगेगा। एक पुरुष अपनी पत्नी में निष्ठा रखने की बजाय कई महिलाओं से चंचलता करता है, फिरे इससे अच्छा लगेगा या बुरा लगेगा। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज के समय में हालात ऐसे हो गए हैं कि भगवानों की गिनती नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति थोड़ा सा भी फेमस हो जाता है, उसे भगवान घोषित कर दिया जाता है।

 कोई उसे कृष्ण का अवतार बताता है, कोई राम का, कोई हनुमान का और कोई शंकर का। किसी को देवी और किसी को नरसिंह का अवतार कह दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इंसान को इंसान ही रहने देना चाहिए। अगर इंसान को भगवान बना दिया जाएगा, तो न वह धरती पर टिक पाएगा और न आकाश में उड़ पाएगा। ऐसी स्थिति में वह बीच में त्रिशंकु की तरह लटक जाता है। ठाकुर ने कहा कि अपने इष्ट पर ध्यान रखकर जो व्यक्ति आगे बढ़ता है, उसे न भटकना पड़ता है और न ही लटकना पड़ता है। कथा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान को जानना भी जरूरी है और भगवान को मानना भी। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बिना जाने ही जी रहा है। वह भगवान को न ठीक से जानता है और न पूरी तरह मानता है, लेकिन फिर भी जीवन चला रहा है।

आपने कोई दरवाजा नहीं छोड़ा यही आपकी गलती
कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए उन्होंने कहा- लोग कहते हैं हम भजन करते हैं भक्ति करते हैं हमने कोई दरवाजा नहीं छोड़ा फिर भी हम दुखी क्यों हैं परेशान क्यों है ? ऐसे में आपके प्रश्न में ही उत्तर मिल जाता है कि आपने कोई दरवाजा नहीं छोड़ा यही आपकी गलती है?

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SJK News Chief Editor (SJK News)