जयपुर। राज्य सरकार द्वारा आमजन की शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के प्रति अपनाई जा रही सख्त नीति के तहत ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने बुधवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान शासन सचिव ने टोंक जिले के परिवादी शिवराज एवं ब्यावर जिले के परिवादी शेरसिंह से दूरभाष पर संवाद किया। दोनों परिवादियों ने अवगत कराया कि महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत ग्राम पंचायत में नवीन जॉब कार्ड हेतु आवेदन प्रस्तुत करने के उपरांत भी कई माह से जॉब कार्ड जारी नहीं किया गया है।
प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए कुणाल ने रामसागर मीणा, कनिष्ठ सहायक, ग्राम पंचायत सीन्दरा, पंचायत समिति निवाई (टोंक), जितेन्द्र छाबा, ग्राम विकास अधिकारी तथा रामदेव चौधरी, कनिष्ठ सहायक, ग्राम पंचायत सेवरिया (ब्यावर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने एवं उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
इसी प्रकार इन्द्रसिंह, वरिष्ठ सहायक, ग्राम पंचायत सम्बाडिया, पंचायत समिति बिलाड़ा (जोधपुर) को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवाद के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बरतने पर निलंबित किया गया।
शासन सचिव ने निरीक्षण के दौरान विभागीय प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न योजनाओं से संबंधित प्राप्त परिवादों के विषय, औसत निस्तारण अवधि एवं निस्तारित प्रकरणों के संतुष्टि स्तर का अवलोकन किया। उन्होंने लंबित प्रकरणों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
कुणाल ने संपर्क पोर्टल पर विभाग से संबंधित 10 प्रमुख विषयों की समीक्षा करते हुए विभाग की नवीन योजनाओं को भी पोर्टल पर शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पोर्टल पर दर्ज सभी प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए तथा लंबित प्रकरणों के लिए संबंधित कार्मिक की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
निरीक्षण के दौरान शासन सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं महात्मा गांधी नरेगा से संबंधित परिवादों के परिवादियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने नरेगा अंतर्गत जॉब कार्ड जारी करने में देरी, निर्धारित समयावधि में रोजगार उपलब्ध नहीं करवाने तथा जॉब कार्ड वितरण में अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर विशेष गंभीरता जताई।
इसी क्रम में नागौर जिले के परिवादी राजाराम के प्रकरण में आवास की तृतीय किश्त के भुगतान में विलंब की शिकायत पर वार्ता की गई। जांच में पाया गया कि आधार ऑथेन्टिकेशन पूर्ण नहीं होने के कारण राशि का हस्तांतरण लंबित है। इस पर संबंधित अधिकारियों को सात दिवस में तकनीकी समस्या का समाधान कर राशि हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान कुणाल ने बारां, बूंदी, झालावाड़, ब्यावर, जोधपुर, हनुमानगढ़, सिरोही एवं नागौर जिलों के विभिन्न परिवादियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा मौके पर ही समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। इसी के साथ निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर चार कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए।
संपर्क पोर्टल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विगत एक वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित कुल 57,743 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 55,339 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है, जो लगभग 95 प्रतिशत है। इसी प्रकार मनरेगा से संबंधित 57,077 प्रकरणों में से 54,387 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है। विभाग में शिकायतों के निस्तारण की औसत अवधि 14 दिन है।
इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त (मनरेगा) श्री जुगल किशोर मीणा, परियोजना निदेशक एवं पदेन उप सचिव श्री अजय कुमार आर्य, राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी (राजस्थान संपर्क) श्री के. के. शर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं, जिससे नागरिकों को घर बैठे शिकायत दर्ज कराने एवं त्वरित समाधान प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध हो रही है।