आत्म अवलोकन का शुभारंभ क्षमा से :ऊर्जयंत सागर जी
प्रभु स्मरण करते समय भावों में शुद्धता का होना परम आवश्यक
जयपुर : श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में विराजमान परम पूज्य उपाध्याय श्री ऊर्जयंत सागर जी महाराज ने आज दश लक्षण महापर्व के अंतर्गत वरुण पथ समाज द्वारा आत्म अवलोकन के भावों से आयोजित धर्म सभा में उपस्थित जन समुदाय को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि जैन दर्शन में यदि आप क्षमा के महत्व को नही समझ पाए तो आपका कल्याण नही हो सकता भव्य आत्माओं हम आज अपनी आत्मा के अवलोकन के लिए इस अनुष्ठान में आहुति देंगे और अपने जीवन का कल्याण करने का प्रयास करेंगे इसलिए प्रभु स्मरण करते समय भावों में शुद्धता का होना परम आवश्यक है यदि आपका मन कही और और शरीर कही और हो तो आप पूजा के फल को प्राप्त नही कर सकते इसलिए इस 10 दिवसीय महायज्ञ का शुभारंभ क्षमा से किया जाता है ताकि हम मन में आए विकारो को समाप्त कर अपने जीवन का कल्याण कर सके
अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि 10 लक्षण महापर्व का विधि पक्ष शुभारंभ श्री जी के अभिषेक एवं शांति धारा से हुआ इस अवसर पर मूल नायक भगवान महावीर की शांति धारा करने का सौभाग्य श्यामा देवी सुनील सुनीता गोधा को प्राप्त हुआ
संगठन मंत्री विनेश सोगानी ने बताया कि आत्म अवलोकन समारोह का ध्वजारोहण के माध्यम से विधिवत शुभारंभ करने का सौभाग्य सुरेश पुष्पा आशीष करुणा तन्मय अविरल जैन गोधा परिवार को प्राप्त हुआ दश लक्षण महापर्व कार्यक्रम के संयोजक ज्ञान बिलाला ने बताया कि प्रोफेसर हितेंद्र जैन के निर्देशन में विद्यासागर सभागार भवन में 10 दिवसीय विधान का आयोजन किया जा रहा है इस अवसर पर आयोजित सभी क्रियाएं आज के सोधर्म इंद्र पूरणमल ललीता देवी अनोपडा को प्राप्त हुआ इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी एवं वात्सल्य रत्नाकर आचार्य गुरुवर विमल सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य सोधर्म इन्द्र को प्राप्त हुआ इस अवसर पर एमपी जैन, ज्ञान बिलाला , कैलाश सेठी,विनेश सोगानी, गिरीश जैन, ने सभी अतिथियों का सम्मान किया
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