अहंकार के पतन से मनुष्य को लक्ष्य की प्राप्ति : ऊर्जयंत सागर जी
वर्तमान में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या उसका अहंकार
जयपुर : श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में विराजमान परम पूज्य उपाध्याय श्री ऊर्जयंत सागर जी महाराज ने आज दश लक्षण महापर्व के अंतर्गत वरुण पथ समाज द्वारा आत्म अवलोकन पर्व में उतम मार्दव धर्म पर आयोजित सभा में उपस्थित जन समुदाय को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि वर्तमान में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या उसका अहंकार है जब तक आप अहंकार रूपी विकार को अपने से अलग नही करेंगे तब तक आपके जीवन का मार्ग प्रशस्त नही हो सकता इसलिए बंधुओं जीवन में झुकने से वह सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है जो हम चाहते हैं लेकिन अकड़ और अहंकार हमारे आचरण में इतना समा चुका है कि हम सरलता और विनय भाव रखने वाले रास्ते के दरवाजों को बंद कर चुके हैं लेकिन यदि आप समय रहते धर्म के मार्ग पर चलने का निश्चय करले तो आपका अहंकार रूपी पर्वत खंड-खंड हो सकता है जिससे आपका मनुष्य रूप में आना सार्थक हो सकता है क्योंकि जीवन में सरलता के बिना कुछ भी प्राप्त करना मुश्किल है इसलिए सम्मान करना सीखिए सम्मान करने से जीवन में सरलता का समावेश होता है और सरलता सफलता का मूल मंत्र है
अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व में आज उतम मार्दव दिवस का विधिवत शुभारंभ श्री जी के अभिषेक एवं शांति धारा से हुआ इस अवसर पर मूल नायक भगवान महावीर की शांति धारा करने का सौभाग्य चंदा देवी महेंद्र कासलीवाल को प्राप्त हुआ
संगठन मंत्री विनेश सोगानी ने बताया कि प्रोफेसर हितेंद्र जैन के निर्देशन में विद्यासागर सभागार भवन में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत आज उतम मार्दव विधान का आयोजन किया गया इस अवसर पर आयोजित सभी क्रियाएं करने का अवसर आज के सोधर्म इंद्र गिरीश जी श्रीमती सोमा जी जैन को प्राप्त हुआ इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी एवं वात्सल्य रत्नाकर आचार्य गुरुवर विमल सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य सोधर्म इन्द्र को प्राप्त हुआ इस अवसर पर एमपी जैन, ज्ञान बिलाला , पूरण मल अनौपड़ा कैलाश सेठी,विनेश सोगानी, राजेन्द्र सोनी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया
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